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टीबी मुक्त बिहार के लिए जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता जरूरी : राज्यपाल

टीबी मुक्त बिहार के लिए जनभागीदारी और सामाजिक जागरूकता जरूरी : राज्यपाल

सुदृढ़ जांच एवं उपचार व्यवस्था से टीबी मुक्त बिहार की ओर बढ़ रहा राज्य : श्री निशांत

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, छपरा (बिहार):

पटना के अधिवेशन भवन में बुधवार को राज्य स्तरीय टीबी मुक्त बिहार सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का उद्घाटन बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने किया। राज्यपाल के आगमन पर माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने पौधापात्र भेंट कर उनका स्वागत किया। इस अवसर पर टीबी उन्मूलन के लिए राज्य में किए जा रहे प्रयासों और उपलब्धियों पर चर्चा हुई।

 

इस अवसर पर माननीय राज्यपाल ने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक सहभागिता और सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ा अभियान है। उन्होंने समय पर जांच, उपचार और पोषण सहायता के महत्व पर बल देते हुए टीबी मुक्त बिहार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी वर्गों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टीबी-मुक्त बिहार केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

 

भारत में टीबी उन्मूलन के लिए वैश्विक लक्ष्य से पहले आगे बढ़ने का साहसिक संकल्प लिया है इसमें बिहार राज्य की अहम भूमिका अदा कर रहा है। टीबी उन्मूलन के मार्ग में आशा कार्यकर्ता, एएनएम, नर्स, चिकित्सक, स्वास्थ्य कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मी इस अभियान के वास्तविक नायक हैं, जिनकी प्रतिबद्धता से हजारों जिंदगियां बचाई जा रही हैं, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग बधाई का पात्र है।

 

स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने कहा कि प्रधानमंत्री के टीबी मुक्त भारत अभियान के अनुरूप बिहार सरकार टीबी उन्मूलन के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। जांच एवं उपचार सुविधाओं का लगातार विस्तार किया गया है, जिससे अधिक से अधिक मरीजों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके। राज्य के 499 स्वास्थ्य संस्थानों में एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है तथा घर-घर स्क्रीनिंग को और प्रभावी बनाने के लिए 185 पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा राज्य में 768 माइक्रोस्कोपी सेंटर, 4 कल्चर एवं डीएसटी प्रयोगशालाएं, 91 टीबी-नेट तथा 560 ट्रू-नेट मशीनें कार्यरत हैं, जिनके माध्यम से मरीजों को निःशुल्क जांच एवं उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है।

 

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी मुक्त बिहार बनाने के लिए जो भी संसाधन और सुविधाएं आवश्यक होंगी, उन्हें राज्य सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने ये कहा कि जब से मैं स्वास्थ्य मंत्री बना हूं, तब से स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ एवं जनहितैषी बनाने के लिए मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के लाभार्थियों की वार्षिक आय सीमा को ₹2.5 लाख से बढ़ाकर ₹4 लाख कर दिया गया है, जिससे अधिक से अधिक जरूरतमंद परिवारों को सहायता मिल सकेगी।

 

अस्पतालों में पारदर्शिता बढ़ाने और मरीजों की सुविधा के लिए डिजिटल स्क्रीन लगाई जाएंगी, जिन पर उपलब्ध बेडों की संख्या प्रदर्शित होगी। इससे मरीजों एवं उनके परिजनों को वास्तविक समय में बेड की उपलब्धता की जानकारी प्राप्त हो सकेगी। स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए जल्द ही आम जनता के लिए एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी किया जाएगा, जिस पर लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। उन्होंने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ करने का आह्वान किया।

माननीय मंत्री ने ये भी कहा कि नेशनल हाइवे / स्टेट हाइवे पर दुर्घटनाग्रस्त लोगों के इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर की स्थापना करने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। प्रत्येक टॉल प्लाजा पर एम्बुलेंस की सुविधा के लिए काम हो रहा है। राज्य के किसी भी क्षेत्र से कोई भी व्यक्ति अपनी शिकायत/सुझाव एक विशेष दूरभाष संख्या पर Grievance Cell (शिकायत कोषांग) में 24X7 दर्ज करा सकेंगे। राज्य के विभिन्न जिलान्तर्गत स्थित चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों से रेफर की आवश्यकता कम हो, इसके लिए काम हो रहा है।

 

उन्होंने कहा कि होमियोपैथी/आयुर्वेद की दवा भी आवश्यक औषधि सूची (EDL) में शामिल किया जा रहा है। इसकी दवाएँ भी मुफ्त मरीजों को दी जाएँगी। औषधि की गुणवत्ता की नियमित जाँच एवं उचित रख-रखाव का आदेश दिया गया है। अस्पतालों में स्वास्थ्य उपकरण पर्याप्त संख्या में हो तथा उसे सही तरीके से उपयोग में लाया जाय एवं नियमित रख-रखाव पर गंभीरतापूर्वक ध्यान दिया जाय। विभाग सुनिश्चित करेगा कि सभी कार्यरत चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मी अपने वर्तमान पदस्थापन स्थल पर रोस्टर ड्यूटी के अनुसार समय पर उपस्थित एवं कार्यरत रहेंगे। बिचौलियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया गया है एवं भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति रहेगी।

 

स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री कुमार रवि ने कहा कि राज्य में टीबी उन्मूलन को लेकर 100 दिनों का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत टीबी रोगियों के लिए निःशुल्क जांच, उपचार एवं आवश्यक सेवाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य में टीबी उपचार की सफलता दर 88 प्रतिशत रही, जो स्वास्थ्य विभाग के निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है। उन्होंने कहा कि पंचायती राज विभाग के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग टीबी मुक्त बिहार के संकल्प को साकार करने की दिशा में कार्य कर रहा है तथा अब तक राज्य की 547 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है।

 

इस सम्मेलन के दौरान टीबी उन्मूलन की दिशा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सम्मानित भी किया गया। निक्षय मित्र पहल के अंतर्गत 9 व्यक्तियों एवं संस्थाओं को टीबी मरीजों के पोषण, सहयोग एवं सामुदायिक सहभागिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। वहीं राज्य स्तरीय पुरस्कार के तहत स्वास्थ्य विभाग के 12 अधिकारियों एवं कर्मियों को टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मान प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त प्रखंड स्तरीय सम्मान के अंतर्गत सिवान जिले के मैरवा प्रखंड, सीतामढ़ी जिले के बेलसंड प्रखंड तथा मुंगेर जिले के जमालपुर प्रखंड के पांच-पांच स्वास्थ्यकर्मियों को टीबी उन्मूलन अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन, सक्रिय जन-जागरूकता एवं मरीजों की पहचान एवं उपचार सुनिश्चित करने में सराहनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर श्री दीपक कुमार सिंह, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव, श्री कुमार रवि, सचिव, स्वास्थ्य विभाग, श्री मनोज कुमार, सचिव, पंचायती राज विभाग, श्री अमित कुमार पाण्डेय, कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, श्री कुमार गौरव, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, डॉ. अनुपमा सिंह, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, माननीय स्वास्थ्य मंत्री के आप्त सचिव श्री कौशलेंद्र कुमार के साथ स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहें।

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