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बिहार में बायोमेट्रिक हाजिरी पर मिलेगा शिक्षकों का वेतन

बिहार में बायोमेट्रिक हाजिरी पर मिलेगा शिक्षकों का वेतन

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार के सरकारी स्कूलों और शिक्षा विभाग के दफ्तरों में काम करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए एक बेहद जरूरी खबर है. अब अगर आपने डिजिटल हाजिरी नहीं बनाई, तो आपकी सैलरी रुक सकती है. शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि जून महीने का वेतन सिर्फ और सिर्फ बायोमेट्रिक हाजिरी के आधार पर ही दिया जाएगा. इसके लिए राज्यभर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं.

इ-शिक्षाकोष ऐप से दर्ज होगी हाजिरी

नए नियम के मुताबिक, सभी स्कूलों के हेडमास्टर, टीचर और ऑफिस के कर्मचारियों को इ-शिक्षाकोष ऐप और बीबीएएस (BBAS) सिस्टम के जरिए अपनी बायोमेट्रिक उपस्थिति लगानी होगी. हर महीने सैलरी जारी करने से पहले इस डिजिटल हाजिरी का मिलान किया जाएगा.

शिक्षा विभाग ने आदेश दिया है कि जिन नए अपग्रेड हुए मिडिल, हाई या इंटर स्कूलों में बायोमेट्रिक मशीनें नहीं हैं या कोई तकनीकी खराबी है, उन्हें तुरंत ठीक किया जाए. कई जिलों के डीएम ने भी कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं कि मई की सैलरी तो जैसे-तैसे मिल जाएगी, लेकिन जून से बिना डिजिटल हाजिरी के वेतन जारी नहीं होगा. सभी ऑफिस प्रभारियों को हाजिरी का प्रिंट आउट और सर्टिफिकेट जमा करना होगा.

नियोजित शिक्षकों के वेतन के लिए 556 करोड़ रुपए मंजूर

इसी बीच बिहार सरकार ने राज्य के प्राइमरी स्कूलों में काम करने वाले नियोजित शिक्षकों को एक बड़ी राहत दी है. शिक्षा विभाग ने वर्ष 2026-27 के तहत शिक्षकों के वेतन के लिए 556 करोड़ 29 लाख 35 हजार 400 रुपए की भारी-भरकम राशि मंजूर कर दी है.

विभाग के उपसचिव अजय सतीश भेंगरा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, यह पैसा उन नियोजित शिक्षकों के लिए है जिनका पूरा वेतन राज्य सरकार खुद देती है. इस मद के लिए सरकार का कुल बजट 1685 करोड़ 73 लाख 80 हजार रुपए है, जिसकी यह पहली किस्त जारी की गई है.

मुफ्त शिक्षा के तहत हुई थी बहाली

सरकार ने याद दिलाया कि इन शिक्षकों की बहाली संविधान के अनुच्छेद 21(क) के तहत 6 से 14 साल के बच्चों को मुफ्त और जरूरी शिक्षा देने के लिए नगर निकायों, ब्लॉकों और पंचायतों में की गई थी. शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द इस पैसे से शिक्षकों का वेतन बांटें.

अगर भुगतान में कोई गड़बड़ी होती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी डीईओ की होगी. यह पूरा लेन-देन सीएफएमएस (CFMS) सिस्टम से होगा और इस पैसे को किसी दूसरे काम में खर्च नहीं किया जा सकेगा.

इन जिलों को मिला सबसे ज्यादा आवंटन

जिलावार आवंटन में पश्चिम चंपारण को लगभग 27.55 करोड़ रुपये, दरभंगा को 23.19 करोड़ रुपये, पटना को करीब 21.99 करोड़ रुपये और मुजफ्फरपुर को 18.08 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. इसके अलावा अररिया, अरवल, बांका, बक्सर, नवादा समेत कई जिलों को भी करोड़ों रुपये की राशि दी गई है.

शिक्षकों की आपत्ति

दूसरी ओर, इस आदेश से आक्रोशित शिक्षकों का साफ कहना है कि वे तय समय पर स्कूल आए थे। उन्होंने बायोमेट्रिक सिस्टम पर हाजिरी भी दर्ज की थी और डेटा सिंक भी हुआ था। इसके बावजूद ऑनलाइन पोर्टल पर ”नॉट मार्क्ड” दिखना सीधे तौर पर ई-विद्यावाहिनी सॉफ्टवेयर की तकनीकी विश्वसनीयता पर सवालिया निशान खड़ी करता है। शिक्षकों के अनुसार, वे बिना किसी गलती के विभाग और तकनीकी गड़बड़ी की दोहरी मार झेल रहे हैं.

डीएसई का रुख

इस पूरे मामले पर डीएसई कैलाश मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऑनलाइन पोर्टल पर ”नॉट मार्क्ड” दिखने का सीधा और साफ मतलब यही है कि शिक्षक स्कूल नहीं आए हैं। विभाग ऑनलाइन रिकॉर्ड को ही अंतिम मानकर कार्रवाई कर रहा है.

संघों की चिंता

एक ही प्रखंड में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति गायब दिखना अब चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षक संघों का कहना है कि अगर डेटा सिंक होने के बाद भी हाजिरी ऑनलाइन नहीं दिख रही, तो इसके लिए शिक्षक दोषी हैं या फिर ई-विद्यावाहिनी सॉफ्टवेयर, फिलहाल इस कार्रवाई के बाद से प्रखंड के शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है.

 

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