कृषि विज्ञान केन्द्र माँझी में मशरूम के विभिन्न प्रकार एवं खेती की तकनीकें विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का हुआ समापन
श्रीनारद मीडिया, मांझी, सारण (बिहार):

ग्रामीण क्षेत्र के युवक एवं युवतियों को स्वरोजगार की दिशा में प्रेरित करने तथा मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केन्द्र, मांझी में आयोजित “मशरूम के विभिन्न प्रकार एवं उनकी खेती की तकनीकें विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज दिनाँक 22 अप्रैल, 2026 यानि बुधवार को सफलतापूर्वक सम्पन हो गया।
इस प्रशिक्षण में सारण जिले के माँझी, रिवीलगंज, एकमा, गड़खा, बनियापुर, मढ़ौरा, छपरा एवं सोनपुर प्रखंडों से आए 28 युवक एवं युवतियों ने भाग लिया और मशरूम उत्पादन से जुड़ी वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जानकारी प्राप्त की। समापन समारोह में कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. संजय कुमार राय ने कहा कि मशरूम उत्पादन कम लागत में अधिक लाभ देने वाला उद्यम है, जिसे ग्रामीण युवा अपने घर के सीमित स्थान में भी शुरू कर सकते हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण के महत्व को समझाते हुए अपने-अपने क्षेत्र में मशरूम उत्पादन को अपनाने और अन्य लोगों को भी इससे जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि मशरूम उत्पादन में स्वच्छता अत्यंत आवश्यक है। उत्पादन कक्ष, उपकरण और हाथों की साफ-सफाई न होने पर रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। केसिंग सामग्री की सही तैयारी और नमी का संतुलन बनाए रखना भी उच्च गुणवत्ता वाले मशरूम के लिए जरूरी है। इसके साथ ही वैज्ञानिक तरीके से रोग प्रबंधन अपनाकर रासायनिक दवाओं के प्रयोग को कम किया जा सकता है। मूल्य संवर्धन के संदर्भ में वैज्ञानिकों ने बताया कि मशरूम को सुखाकर, पाउडर बनाकर या अचार एवं सूप के रूप में प्रसंस्कृत कर बाजार में बेचा जाए तो किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है।
डॉ. जितेन्द्र चंदोला ने प्राकृतिक खेती, सब्जी एवं फलों की उन्नत खेती के तरीकों पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. जीर विनायक ने बटन एवं ओएस्टर मशरूम उत्पादन की तकनीक, खाद बनाने की विधि, मशरूम के विभिन्न प्रकार, स्पॉन बनाना, बीज की तैयारी एवं उपचार, केसिंग, रोग प्रबंधन तथा मशरूम के मूल्य संवर्धन एवं प्रसंस्करण के बारे में विस्तार से बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को प्रयोगात्मक रूप से भी मशरूम उत्पादन की प्रक्रिया समझाई गई, जिससे उन्हें व्यवहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके अलावा डॉ. सुषमा टम्टा ने कृषि में उपयोग होने वाली आधुनिक मशीनों जैसे जीरो टिलेज मशीन एवं लेजर लैंड लेवलर के उपयोग की जानकारी दी।
डॉ. विजय कुमार ने मिट्टी की जांच के महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि मिट्टी परीक्षण के आधार पर सही फसल और उर्वरक का चयन कर उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में कृषि विज्ञान केन्द्र, मांझी से अमितेश कुमार गौरव, राकेश कुमार, मनोज कुमार, उमाशंकर, अवनीश पांडेय एवं संतोष कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
