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सारण में गेट्स फाउंडेशन टीम का दौरा, फाइलेरिया-कालाजार उन्मूलन की जमीनी हकीकत परखी

सारण में गेट्स फाउंडेशन टीम का दौरा, फाइलेरिया-कालाजार उन्मूलन की जमीनी हकीकत परखी
•फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन के प्रयासों का जमीनी हकीकत का किया तहकीकात
* जीविका समूह जनप्रतिनिधि और आम जनता से टीम ने किया संवाद
* आम पर गठित पीएसपी के कार्यों का समीक्षा
* सिविल सर्जन को टीम ने दिया सुझाव

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर/छपरा (बिहार):

 

सारण जिले में फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन को लेकर चल रहे अभियानों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए गेट्स फाउंडेशन की टीम ने विभिन्न गांवों और स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तृत निरीक्षण किया। टीम ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता का आकलन किया, बल्कि मरीजों, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्यकर्मियों से सीधा संवाद कर योजनाओं के प्रभाव और चुनौतियों को भी समझा।

जिले में वेक्टर जनित बीमारियों के उन्मूलन के लिए चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा हेतु दिल्ली से आई गेट्स फाउंडेशन की टीम ने अमनौर, रिविलगंज और दिघवारा प्रखंडों का दौरा किया। टीम का नेतृत्व डॉ. मानिक रेहान कर रहे थे, जबकि पिरामल फाउंडेशन पटना से अभिषेक सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे।

सबसे पहले टीम ने अमनौर प्रखंड के अपहर पंचायत का भ्रमण किया, जहां जीविका समूह, पंचायत प्रतिनिधियों, आशा कार्यकर्ताओं और ग्रामीण चिकित्सकों के साथ बैठक कर फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन को लेकर चल रहे प्रयासों की जानकारी ली। इस दौरान टीम ने मरीजों से सीधे संवाद करते हुए यह जाना कि उन्होंने मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (MDA) के तहत दवा का सेवन किया है या नहीं, तथा उन्हें एमएमडीपी किट उपलब्ध कराई गई है या नहीं।टीम ने नाइट ब्लड सर्वे (NBS) और MDA अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका की सराहना की और कहा कि जनभागीदारी से ही इन बीमारियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। इस दौरान मुखिया आशा पासवान, प्रतिनिधि सरोज पासवान, वीबीडीएस अभिषेक कुमार मौजूद थे।

इसके बाद टीम ने सराय बॉक्स स्थित हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (HWC) का निरीक्षण किया। यहां मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं, फाइलेरिया मरीजों की संख्या, एमएमडीपी किट वितरण और क्लिनिक संचालन की स्थिति की बारीकी से समीक्षा की गई। टीम ने यह भी जाना कि मरीजों को उपचार और परामर्श किस स्तर तक उपलब्ध हो रहा है।

पीएसपी के माध्यम से बढ़ी जागरूकता:

रिविलगंज प्रखंड के इनई आयुष्मान आरोग्य मंदिर में टीम ने पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (PSP) के सदस्यों के साथ संवाद किया। यहां के सीएचओ ने बताया कि पीएसपी के माध्यम से समुदाय में फाइलेरिया सहित अन्य स्वास्थ्य मुद्दों पर व्यापक जागरूकता फैलाई जा रही है। उन्होंने बताया कि पहले जहां स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की संख्या कम रहती थी, वहीं अब जागरूकता के कारण ओपीडी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पीएसपी के जरिए मरीजों को सरकारी योजनाओं से जोड़ते हुए उन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र, ट्राइसाइकिल और बैटरी चालित व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं भी दिलाई जा रही हैं। टीम ने पीएसपी के कार्यों की सराहना करते हुए इसे समुदाय आधारित स्वास्थ्य सुधार का प्रभावी मॉडल बताया।

स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक:

दौरे के क्रम में टीम ने सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी, डीएमओ डॉ. भूपेंद्र कुमार और जिला वेक्टर रोग सलाहकार सुधीर कुमार के साथ बैठक कर कार्यक्रमों की समीक्षा की।
डॉ. मानिक रेहान ने सुझाव दिया कि सभी सहयोगी संस्थाओं के साथ हर महीने नियमित बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति और चुनौतियों पर चर्चा की जाए, ताकि जमीनी स्तर पर बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें। इस दौरान गेट्स फाउंडेशन के डॉ मानिक, स्टेट पिरामल फाउंडेशन के अभिषेक सिंह, पिरामल के डिस्ट्रिक्ट लीड दिलीप मिश्रा, प्रोग्राम लीड चंदन कुमार, पीओसीडी पंकज कुमार, अमितेश कुमार, तेज नारायण, सिफार से नेहा कुमारी, रिजनल प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर गणपत आर्यन, प्रोग्राम एसोसिएट कृष्णा सिंह समेत अन्य मौजूद थे।

कालाजार प्रभावित बच्चे से की मुलाकात:
टीम ने दिघवारा प्रखंड के झोवा गांव का भी दौरा किया, जहां 10 माह पूर्व कालाजार से पीड़ित एक 8 वर्षीय बच्चे से मुलाकात कर उसके इलाज और स्वास्थ्य लाभ की जानकारी ली। टीम ने परिजनों से बातचीत कर बीमारी की पहचान, उपचार प्रक्रिया और सरकारी सहायता के बारे में जानकारी ली तथा संबंधित अधिकारियों को क्षतिपूर्ति राशि शीघ्र उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।

सिविल सर्जन डॉ राजकुमार चौधरी ने कहा कि सारण जिले में फाइलेरिया और कालाजार उन्मूलन को लेकर कई स्तरों पर प्रयास हो रहे हैं, लेकिन इन प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समुदाय की भागीदारी, नियमित मॉनिटरिंग और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। टीम द्वारा दिए गए सुझाव आने वाले समय में इन बीमारियों के उन्मूलन अभियान को नई दिशा दे सकते हैं।

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