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एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों में मिशन मोड में होगी सक्रिय टीबी की पहचान और उपचार

एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों में मिशन मोड में होगी सक्रिय टीबी की पहचान और उपचार
• एआरटी सेंटर आने वाले प्रत्येक व्यक्तियों की होगी टीबी स्क्रिनिंग
• कार्यपालक निदेशक ने जारी किया निर्देश
• सभी टीबी रोगियों की भी होगी एचआईवी की जांच

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, सारण (बिहार):

 


छपरा। टीबी उन्मूलन की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अब जिले में एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में मिशन मोड में सक्रिय टीबी की पहचान और उपचार सुनिश्चित की जायेगी। इसको लेकर राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने पत्र जारी कर सभी जिला यक्ष्मा पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है।

तीन माह तक मिशन मोड में होगा स्क्रिनिंग
जारी पत्र में कहा गया है कि एचआईवी संक्रमण के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे लेटेंट टीबी संक्रमण के एक्टिव टीबी में परिवर्तित होने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों से यह स्पष्ट है कि एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में टीबी संक्रमण एवं टीबी जनित मृत्यु दर सामान्य व्यक्तियों की अपेक्षा अधिक पायी जाती है। आगामी तीन माह के भीतर मिशन मोड में सभी एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की टीबी स्क्रीनिंग, जाँच और उपचार सुनिश्चित किया जाए।


संदिग्ध लक्षण मिलने पर होगा एक्सरे और बलगम जांच:
राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम और राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के समन्वय को सुदृढ़ करते हुए आदेश दिए गए हैं कि जिले के सभी एंटी-रेट्रोवायरल उपचार केंद्रों, लिंक केंद्रों एवं एकीकृत परामर्श और जाँच केंद्रों में आने वाले प्रत्येक एचआईवी संक्रमित व्यक्ति की नियमित क्षय रोग जाँच की जाए। संदिग्ध लक्षण मिलने पर तत्काल छाती का एक्स-रे, थूक परीक्षण और आवश्यक अन्य जाँचें करायी जाएँ।

टीबी के मरीजों का होगा एचआईवी जांच
उपचार केंद्रों में पंजीकृत सभी एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की प्रतिमाह क्षय रोग जाँच हो और उसका अद्यतन विवरण संधारित किया जाए। इसके साथ ही एंटी-रेट्रोवायरल उपचार केंद्र एवं जिला क्षय केंद्र के बीच द्विदिश जाँच को प्रभावी बनाया जाएगा। अर्थात सभी एचआईवी संक्रमितों की क्षय जाँच और सभी क्षय रोगियों की एचआईवी जाँच अनिवार्य रूप से होगी। क्षय रोग से संक्रमित पाए जाने वाले एचआईवी रोगियों को तत्काल राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत उपचार से जोड़ा जाएगा और एंटी-रेट्रोवायरल चिकित्सा तथा क्षय-रोधी चिकित्सा दोनों का समन्वित अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा। गंभीर मामलों में समय पर उच्च संस्थानों को भेजकर नियमित अनुवर्ती देखभाल की व्यवस्था भी की जाएगी।

एचआईवी-टीबी रोग समन्वय समिति की होगी बैठक
जिला स्तर पर एचआईवी-क्षय रोग समन्वय समिति की नियमित बैठकें होंगी, जिनमें जाँच, परीक्षण, उपचार और उपचार परिणाम की समीक्षा की जाएगी। इन गतिविधियों की मासिक प्रतिवेदन निर्धारित प्रारूप में राज्य मुख्यालय को भेजी जाएगी। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में क्षय रोग की शीघ्र पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराना और मृत्यु दर में प्रभावी कमी लाना है।

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क औषधि उपलब्ध
क्षय रोग (टीबी) एक जीवाणुजनित संक्रामक रोग है जो मुख्यतः फेफड़ों को प्रभावित करता है, किन्तु यह हड्डियों, गुर्दों और मस्तिष्क को भी नुकसान पहुँचा सकता है। यह रोग वायु के माध्यम से फैलता है जब कोई संक्रमित व्यक्ति खाँसता या छींकता है तो जीवाणु वायु में मिल जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि क्षय रोग पूरी तरह उपचार योग्य है। सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर निःशुल्क औषधि उपलब्ध है और यदि उपचार नियमित रूप से पूरा किया जाए तो रोगी पूर्णतः स्वस्थ हो सकता है।

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