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बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप,क्यों?

बंगाल में भाजपा की जीत से ढाका में हड़कंप,क्यों?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ऐतिहासिक जीत की गूंज भारत ही नहीं, बांग्लादेश में भी सुनाई दे रही है. ढाका के सियासी गलियारों और वहां के मीडिया जगत में भाजपा के सत्ता में आने को लेकर गहरी बेचैनी और सस्पेंस का माहौल है.

ममता के शासन का अंत भू-राजनीतिक झटका : बांग्लादेशी मीडिया

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत और भाजपा का उदय ढाका के लिए किसी बड़े ‘भू-राजनीतिक झटके’ से कम नहीं है. वहां के अखबारों और नेताओं को डर है कि भाजपा सरकार अब सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और शरणार्थियों के मुद्दे पर ‘आर-पार’ के मूड में होगी, जिससे बांग्लादेश में आर्थिक और मानवीय संकट गहरा सकता है.

कांगलू की होगी वापसी? ढाका में शरणार्थी संकट का डर

बांग्लादेश के राजनीतिक गलियारों में भाजपा की जीत को चिंता का विषय बताया जा रहा है. बांग्लादेशी सांसद अख्तर हुसैन ने हाल ही में वहां की संसद में चिंता जतायी थी कि यदि भाजपा बंगाल में सरकार बनाती है, तो वे कथित तौर पर कांगलू (अवैध घुसपैठियों) को वापस बांग्लादेश भेज देंगे.

संकट की आशंका, बॉर्डर पर शरण

हुसैन ने चेतावनी दी कि भारत के इस सख्त कदम से बांग्लादेश में अचानक शरणार्थियों की बाढ़ आ सकती है, जिससे देश पर भारी आर्थिक और सामाजिक दबाव पड़ेगा. ढाका के मीडिया आउटलेट्स जैसे ‘प्रोथोम आलो’ और ‘द डेली स्टार’ ने लिखा है कि भाजपा की जीत से सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा-व्यवस्था पूरी तरह बदलने वाली है.

NRC और तीस्ता जल विवाद पर बढ़ेगा दबाव

बांग्लादेशी विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की जीत का सीधा असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा. बांग्लादेशी मीडिया का कहना है कि अब असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जैसी ‘हार्डलाइन’ नीतियां बंगाल में भी लागू होंगी. इससे अवैध प्रवास का मुद्दा फिर से गर्मायेगा.

तीस्ता जल समझौता और वोट बैंक की राजनीति

बंगाल में भाजपा की सरकार आने से तीस्ता जल बंटवारे जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भारत का रुख और कड़ा हो सकता है, जिससे बांग्लादेश की कृषि प्रभावित होने का डर है. बांग्लादेशी आउटलेट्स ने यह भी विश्लेषण किया है कि इस बार मुस्लिम वोटों के बिखराव ने भाजपा को जीत दिलाने में अहम भूमिका निभायी, जो टीएमसी के लिए ‘डूम्सडे’(कयामत का दिन) साबित हुआ.

पूरी दुनिया की नजर, ढाका हुआ अलर्ट

सोशल मीडिया पर बांग्लादेशी यूजर्स के बीच भी डर और प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है. कई लोगों का मानना है कि ममता बनर्जी के दौर में सीमाओं पर जो ‘सॉफ्ट पॉलिटिक्स’ चलती थी, उसका अब अंत हो गया है. भाजपा का सुशासन और ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का एजेंडा बांग्लादेश के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा पर नयी चुनौतियों को जन्म देगा. ढाका के विशेषज्ञों का कहना है कि उन्हें अब भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को नये सिरे से परिभाषित करने की जरूरत है.

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