बिना डॉक्टर की पर्ची के कफ सीरप नहीं मिलेगा
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पूरे देश में डॉक्टर की पर्ची के बिना कोई भी सीरप नहीं मिलेगा, इसमें कफ सीरप भी शामिल है। पिछले साल कफ सीरप पीने से मध्य प्रदेश और राजस्थान में दो दर्जन से अधिक मौत के बाद सरकार ने कफ सीरप की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए सख्त निगरानी के दायरे में लाया गया है। इसके लिए 1945 के डग्स नियमों में बदलाव किया गया है।
पहले नियम के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खुदरा बिक्री लाइसेंस प्रावधानों का पालन किए बिना कफ सीरप की बिक्री की अनुमति थी, जिसे अब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। निगरानी व्यवस्था को दुरुस्त बनाने के लिए पहले ही आदेश दिया गया था।
लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों से ही मिलेगी कफ सीरप
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नए नियम के तहत ग्रामीण इलाके समेत पूरे देश में अब केवल विधिवत लाइसेंस प्राप्त फार्मेसियों के माध्यम से ही कफ सीरप मिल सकेगा इसे संशोधन आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित औषधि (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है।
कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद नियमों में बदलाव
कफ सीरप से बच्चों की मौत के बाद नियमों को कड़ा करने और नियामक प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए सरकार ने इनमें बदलाव का प्रस्तावित मसौदा जारी किया था और सभी हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए थे। सभी सुझावों पर विचार करने के बाद नियम में बदलाव की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें- स्वास्थ्य मंत्रालय
स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि “कफ सीरप का कारोबार करने वाले निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं को सलाह दी जाती है कि वे औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 और औषधि नियम, 1945 के तहत लागू लाइसेंस और नियामक आवश्यकताओं का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।”
इसके पहले केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने सभी राज्यों को सीरप बनाने वाली इकाइयों डाटा शेयर करने का निर्देश दिया था और उसके बाद उनमें गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (जीएमपी) लागू करने के लिए कड़े कदम उठाए थे।
मध्य प्रदेश और राजस्थान में हुई थी बच्चों की मौत
अब नए संशोधनों के बाद सीडीएससीओ कफ सीरप के निर्माण में लगने वाली कच्चे माल की खरीद से लेकर उनके दुकान में बिक्री तक की कड़ी निगरानी सुनिश्चित कर सकेगा। ध्यान देने की बात है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार जहरीले कफ सीरप को बनाने वाली तमिलनाडु स्थित इकाई में कई खामियां पाई गई थी।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले में बलरामपुर निवासी थोक दवा विक्रेता वरुण लाठ की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति राजीव भारती की अवकाशकालीन एकल पीठ ने कहा कि केवल दवा बिक्री का लाइसेंस होने से किसी व्यक्ति को एनडीपीएस अधिनियम के तहत अभियोजन से छूट नहीं मिल सकती। मामला बलरामपुर जिले के तुलसीपुर थाने में दर्ज मुकदमे से संबंधित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देश पर अशोक मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान कोडीन आधारित कोडीवा कफ सीरप की खरीद-बिक्री से जुड़े अभिलेखों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
आरोप है कि बड़ी मात्रा में कफ सीरप की बिक्री की गई, लेकिन उससे संबंधित निर्धारित रिकार्ड और बिक्री के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। जांच में यह भी सामने आया कि दवा के कथित अवैध डायवर्जन का मामला एक संगठित नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच में आवेदक की भूमिका कोडीनयुक्त कफ सीरप के अवैध नेटवर्क का हिस्सा होने के रूप में सामने आई है। साथ ही बरामद और संबंधित मात्रा व्यावसायिक श्रेणी की होने के कारण एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के कठोर प्रविधान लागू होते हैं।
वहीं बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि वरुण लाठ लाइसेंसधारी थोक दवा विक्रेता हैं और कोडीनयुक्त दवाओं का वैध रूप से क्रय-विक्रय कर सकते हैं। आवेदक से कोई बरामदगी नहीं हुई है और उन्हें झूठा फंसाया गया है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने कहा कि जांच सामग्री से प्रथमदृष्टया कोडीन आधारित दवाओं के कथित डायवर्जन के आरोप गंभीर प्रतीत होते हैं। ऐसे में यह नहीं माना जा सकता कि अभियुक्त दोषी नहीं है। इसी आधार पर जमानत अर्जी खारिज कर दी गई।
