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कैसे पूरा हुआ ‘ऑपरेशन शक्ति’?

कैसे पूरा हुआ ‘ऑपरेशन शक्ति’?

11 मई 1998 को पोखरण में ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत पांच परमाणु परीक्षण किए गए

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

18 मई 1974 की सुबह जैसलमेर के उत्तर-पूर्व में फैले थार रेगिस्तान की शांति अचानक शोर में तब्दील हो गई, जब ठीक 8:05 बजे पोखरण टेस्ट रेंज में एक बटन दबाया गया और धरती कांप उठी।

एक तेज प्रकाश की किरण आसमान को चीरती हुई ऊपर उठी और उसके बाद एक भयंकर गड़गड़ाहट की आवाज सुने दी। इस दिन भारत ने अपना पहला परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया था।

इस ऐतिहासिक पल के साथ भारत अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के बाद दुनिया का छठा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया।

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शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट ने बनाया भारत को न्यूक्लियर पावर

इस परीक्षण को आधिकारिक तौर पर ‘शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोट’ (Peaceful Nuclear Explosion) नाम दिया गया। इसका उद्देश्य साफ था कि भारत अपनी परमाणु क्षमता को रक्षात्मक और शांतिपूर्ण इरादे का प्रतीक बताना चाहता था।

साल 1964 में चीन के परमाणु परीक्षण और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद सुरक्षा की मजबूत ढाल की आवश्यकता ने देश को इस कदम के लिए मजबूर किया था।

कैसे बन भारत न्यूक्लियर पावर?

भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में स्थित CIRUS रिएक्टर, जो ‘एटम्स फॉर पीस’ कार्यक्रम के तहत कनाडा से प्राप्त हुआ था, ने विखंडनीय सामग्री उपलब्ध कराई। इसी का उपयोग हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम तैयार करने में किया गया। इस घटना ने दुनिया को चिंतित कर दिया और परमाणु प्रसार को रोकने के लिए न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (NSG) का गठन हुआ।

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क्या था ‘ऑपरेशन शक्ति’ ?

न्यूक्लियर वेपन्स आर्काइव (NWA) के अनुसार, पोखरण-I के बाद भारत पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव का साया मंडराया। देश ने लगभग 24 वर्ष तक इंतजार किया। फिर 11 मई 1998 को पोखरण में ही ‘ऑपरेशन शक्ति’ के तहत पांच परमाणु परीक्षण किए गए। शक्ति-1 से शक्ति-5 तक। इन परीक्षणों ने भारत को पूर्ण परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया। अमेरिका समेत कई देशों ने प्रतिबंध लगाए, लेकिन समय के साथ वे हटाए गए।

आज भारत अपनी परमाणु क्षमता को निरंतर मजबूत बना रहा है। ‘अग्नि’ मिसाइल श्रृंखला, स्वदेशी परमाणु पनडुब्बियां और आधुनिक डिलीवरी सिस्टम देश की रणनीतिक स्वायत्तता के प्रतीक हैं। पोखरण के रेगिस्तान में हुई वह गर्जना आज भी गूँजती है यह न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि थी, बल्कि एक स्वाभिमानी राष्ट्र का दृढ़ संकल्प भी था, जो कहता है कि शांति की रक्षा के लिए शक्ति जरूरी है।

 

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