बुकर 2026 के लिए भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन हुईं शार्टलिस्ट
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भारतीय मूल की कनाडाई-अमेरिकी लेखिका और अनुवादक पद्मा विश्वनाथन को इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2026 की शार्टलिस्ट में जगह मिली है। उन्हें ब्राजील की लेखिका एना पाउला माया की पुर्तगाली नोवेल आन अर्थ एज इट इज बिनीथ के अंग्रेजी अनुवाद के लिए नामित किया गया है।
निर्णायकों ने इस कृति को क्रूर, रहस्यमयी और सम्मोहक बताते हुए कहा कि यह एक दूरस्थ ब्राजीलियाई जेल कालोनी की पृष्ठभूमि में न्याय और क्रूरता के बीच की सीमाओं के टूटने को दर्शाती है।
जजिंग पैनल में भारतीय लेखिका नीलांजना एस राय भी शामिल हैं। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की राशि 50,000 पाउंड है, जिसे लेखक और अनुवादक के बीच बराबर बांटा जाता है, जबकि शार्टलिस्ट में शामिल प्रत्येक प्रविष्टि को पांच हजार पाउंड मिलते हैं।
58 वर्षीय विश्वनाथन यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस में क्रिएटिव राइटिंग की प्रोफेसर हैं और उनके उपन्यास कई देशों में प्रकाशित हो चुके हैं।
19 मई को होगी विजेता की घोषणा इस वर्ष की सूची में छह में से पांच लेखक और चार अनुवादक महिलाएं हैं, जो ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, ताइवान, ब्रिटेन और अमेरिका सहित आठ देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। विजेता की घोषणा 19 मई को लंदन के टेट माडर्न में होगी।
पाउला माया के चर्चित उपन्यास का किया अनुवाद
पद्मा विश्वनाथन को यह सम्मान ब्राजील की जानी-मानी लेखिका एना पाउला माया के चर्चित उपन्यास ‘ऑन अर्थ ऐज इट इज बिनीथ’ के बेहतरीन अंग्रेजी अनुवाद के लिए दिया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार हर साल दुनिया की उस बेहतरीन साहित्यिक कृति को दिया जाता है, जो मूल रूप से अंग्रेजी के अलावा किसी अन्य भाषा में लिखी गई हो और बाद में उसका अंग्रेजी में अनुवाद प्रकाशित हुआ हो।
उन्हें ब्राजील की लेखिका एना पाउला माया की पुर्तगाली नोवेल आन अर्थ एज इट इज बिनीथ के अंग्रेजी अनुवाद के लिए नामित किया गया है।
निर्णायकों ने इस कृति को क्रूर, रहस्यमयी और सम्मोहक बताते हुए कहा कि यह एक दूरस्थ ब्राजीलियाई जेल कालोनी की पृष्ठभूमि में न्याय और क्रूरता के बीच की सीमाओं के टूटने को दर्शाती है।
जजिंग पैनल में भारतीय लेखिका नीलांजना एस राय भी शामिल हैं। इस प्रतिष्ठित पुरस्कार की राशि 50,000 पाउंड है, जिसे लेखक और अनुवादक के बीच बराबर बांटा जाता है, जबकि शार्टलिस्ट में शामिल प्रत्येक प्रविष्टि को पांच हजार पाउंड मिलते हैं।
58 वर्षीय विश्वनाथन यूनिवर्सिटी ऑफ अर्कांसस में क्रिएटिव राइटिंग की प्रोफेसर हैं और उनके उपन्यास कई देशों में प्रकाशित हो चुके हैं।
इस बार की शॉर्टलिस्ट में शामिल कुल छह पुस्तकों में से ज्यादातर किताबों को महिला लेखिकाओं ने लिखा है। इन किताबों में इतिहास के कुछ सबसे दर्दनाक और गहरे पन्नों को समेटा गया है। इसमें 1930 के दशक का ताइवान, नाजी जर्मनी का खौफनाक दौर और 1979 की ऐतिहासिक ईरान क्रांति शामिल हैं।
पद्मा विश्वनाथन ने कहा कि उन्हें अनुवाद के इस खूबसूरत क्षेत्र में कदम रखने की असली प्रेरणा भारतीय महिला लेखन के एक शानदार संग्रह (एंथोलॉजी) को पढ़कर मिली थी। अब पूरी दुनिया की नजरें 19 मई पर टिकी हैं, जब लंदन में विजेता के नाम का एलान किया जाएगा।
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