Headlines

आईपीएस बच्चू सिंह मीणा सेवानिवृत हो गए है उनका नाम सीवान के चर्चित ऑपरेशन प्रतापपुर से जुड़ा था

आईपीएस बच्चू सिंह मीणा सेवानिवृत हो गए है उनका नाम सीवान के चर्चित ऑपरेशन प्रतापपुर से जुड़ा था

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पूर्व बाहुबली सांसद और राजद के दिवंगत नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन के गढ़ सीवान में उनके पसीने छुड़ाने वाले तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी, बच्चू सिंह मीणा का वर्दी में आज सेवा आख़िरी दिन है। सन् 1996 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी बच्चू सिंह मीणा फिलहाल स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के रूप में कार्यरत थे। अपनी कर्तव्यनिष्ठा और कड़े फैसलों के लिए जाने जाने वाले मीणा ने बिहार में अपने कार्यकाल के दौरान कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों को संभाला।

आईपीएस बच्चू सिंह मीणा को सबसे ज़्यादा प्रसिद्धि 16 मार्च 2001 को सीवान में चलाए गए ‘ऑपरेशन प्रतापपुर’ से मिली। उस समय वह सीवान के एसपी थे और उन्होंने खुद इस पूरे ऑपरेशन को लीड किया था, जिसका उद्देश्य शहाबुद्दीन को गिरफ्तार करना था। घंटों चली इस भयंकर मुठभेड़ में शहाबुद्दीन के 11 समर्थक मारे गए थे, जबकि पुलिस के हवलदार बासुकी नाथ पांडे शहीद हुए थे। इस कड़े पुलिस एक्शन के दौरान ही बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन को गिरफ्तारी से बचने के लिए बुर्का पहनकर घटनास्थल से दुम दबाकर भागना पड़ा था।

‘ऑपरेशन प्रतापपुर’ के दौरान जब पुलिस टीम शहाबुद्दीन के गाँव प्रतापपुर पहुँची, तो उन पर ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार शुरू हो गई थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस टीम ने स्पेशल टास्क फोर्स के साथ मिलकर पीछे हटने की बजाय मोर्चा संभाला। यह भी बताया जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी पीछे हटने का आदेश न दे सकें, इसके लिए उस समय ऑपरेशन टीम द्वारा तमाम वायरलेस सेट बंद कर दिए गए थे। यह कदम उस वक्त के एसपी बच्चू सिंह मीणा के कड़े इरादों को दर्शाता है।

राजस्थान के निवासी बच्चू सिंह मीणा ने बिहार में कई महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने विभिन्न जिलों में एसपी के रूप में सेवा देने के अलावा, पूर्णिया रेंज और मगध क्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक का पद भी संभाला। वह विशेष शाखा के आईजी भी रहे। लगभग चार महीने पहले ही उन्हें इसी विभाग में प्रोमोशन दिया गया था, जिसके बाद वे एडीजी के रूप में नियुक्त हुए। आज, उनकी सेवाओं के अंतिम दिन, उन्हें एक कड़क और बेदाग छवि वाले अधिकारी के रूप में याद किया जा रहा है।

 

Leave a Reply

error: Content is protected !!