Headlines

हेक्सागन प्लान में नेतन्याहू मोदी को क्यों शामिल करना चाहते हैं?

हेक्सागन प्लान में नेतन्याहू मोदी को क्यों शामिल करना चाहते हैं?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

2025 में नेतन्याहू का भारत दौरा तीन बार कैंसिल हुआ। और फिर समाधान वैसे निकला जैसे तुम नहीं आ पा रहे तो मैं ही चला आता हूं। 25 फरवरी को इजराइल के दो दिन के दौरे पर पीएम मोदी गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजराइल दौरा मुकम्मल हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजराइल के दौरे को आप भारत और इजराइल के रिश्तों का स्पेशल 27 भी कह सकते हैं क्योंकि करीब-करीब 27 घंटे का प्रधानमंत्री मोदी का ये इजराइल का दौरा था। 16 समझौते हुए हैं। 11 बड़े ऐलान हुए हैं। कुल 27 बटरल आउटकम्स। रिश्ते को नया नाम मिला है। स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को अब स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप कहा जाएगा। लेकिन इन सब भारीभरकम शब्दों का मतलब क्या है?

मोदी-नेतन्याहू की बैठक में हुए 16 समझौते

भारत और इस्राइल मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को जल्द अंतिम रूप देंगे। रक्षा क्षेत्र में साझा डिवेलपमेंट, प्रॉडक्शन और टेक्नॉलजी ट्रांसफर पर काम करेंगे। संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देंगे। भारत का UPI पेमेंट सिस्टम इस्राइल में भी चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बैठक में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, AI, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में ऐसे 16 समझौतों और सहमति पत्रों पर मुहर लगी।

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में शांति और स्थिरता से भारत के हित जुड़े हैं। हम कंधे से कंधा मिलाकर आतंकवाद और इसके समर्थकों का विरोध करते रहे है और आगे भी करते रहेंगे। भारत मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) और I2U2 (भारत-इस्राइल यूएई-अमेरिका समूह) के तहत सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। मोदी ने कहा कि भारत और इस्राइल ने क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नॉलजी पर साझेदारी क्वांटम और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिलेगी। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी और स्पेस में भी सहयोग बढ़ाएंगे।

बातचीत में तकनीक पर रहा फोकस

दोनों देशों की बातचीत में तकनीक फोकस में रही, इसमें साइबर सेक्योरिटी, इनोवेशन और एआई, रिसर्च और स्टार्ट अप शामिल है। विज्ञान और तकनीक पर मौजूद जॉइंट कमिशन को मंत्रीस्तरीय दर्जे तक ले जाने का फैसला लिया गया। इससे इस क्षेत्र में समन्वय में मदद मिलेगी।भारत में इस्त्राइल की मदद से चल रहे 43 सेंटर ऑफ एक्सीलेस को विस्तार देकर 100 करने पर फैसला। भारत में भारत में एग्रीकल्चर इनोवेशन सेंटर फॉर एग्रीकल्चर की स्थापना होगी।

विदेश सचिव ने बताया कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने ईरान और अमेरिका के मौजूदा तनाव को लेकर बातचीत की। शांति से बातचीत पर जोर दिया। कहा, गाजा के पुनर्निमाण में भी भूमिका देख रहे है।

इजरायली राष्ट्रपति से भी मिले मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस दौरान इस्त्राइल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने शिक्षा, स्टार्टअप, नवाचार, प्रौद्योगिकी और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-इस्त्राइल विशेष साझेदारी को मजबूत करने में राष्ट्रपति हर्जोग के अटूट समर्थन के लिए उनका धन्यवाद किया। उन्होंने इस्राइल के राष्ट्रपति को भारत आने का न्योता भी दिया।

FTA पर वार्ता का दूसरा दौर मई में

भारत और इस फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर दूसरे दौर की बातचीत मई में करेंगे। यह वार्ता इस्त्राइल में होगी। राष्ट्रीय राजधानी में रविवार से शुरू हुआ वार्ता का पहला दौर गुरुवार को पूरा हुआ। दोनों देशों ने FTA के टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर पिछले साल नवंबर में दस्तखत किए थे। दोनों देशो का आपसी कारोबार वित्त वर्ष 2024-25 में करीब 3.62 बिलियन डॉलर का था।

स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व

भारत ने अपने स्ट्रैटेजिक ऑयल रिज़र्व में यानी भारत दुनिया का बड़ा तेल खरीदार है और उसके साथ-साथ भारत ने सऊदी अरब जैसे देश को यह प्रस्ताव भी दे रखा है। कई देशों ने भारत के अंदर अह स्ट्रैटेजिक ऑयल रिजर्व अपना किया है कि यदि पश्चिम एशिया के इलाके के अंदर युद्ध की आग भड़कती है तो आपका तेल निर्यात प्रभावित ना हो। इसके लिए आप आइए हमारे स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व में यानी कर्नाटक के उन चट्टानों के अंदर उन बड़े-बड़े पत्थरों के अंदर उन पहाड़ों के अंदर जो हमने स्ट्रेटेजिक ऑयल रिजर्व बनाए हैं आप उस सुविधा का लाभ उठाइए ताकि आपका ऑयल भारत में तो कंज्यूम हो ही सके।

हेक्सागन प्लान

नेतन्याहू ने पीएम मोदी के आने से ठीक पहले एक विज़न दुनिया के सामने रखा। उनका कहना है कि वह मिडिल ईस्ट के इर्द-गिर्द अलायंस यानी गठबंधनों का एक पूरा सिस्टम बनाना चाहते हैं। इसमें छह तरह के देश शामिल होंगे। पहला भारत जिसे उन्होंने ग्लोबल पावर कहा है। दूसरे अरब देश, तीसरे अफ्रीकी देश, चौथे ग्रीस और साइपस जैसे मेडिटेरेनियन देश और बाकी एशिया के कुछ और देश। अब अगर आप नक्शे पर नजर डालें तो यह बिल्कुल वैसा ही नक्शा है जैसा आईएमईसी यानी इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर का था। लेकिन नेतन्याहू का मकसद सिर्फ व्यापार नहीं है।

वो साफ कह रहे हैं कि यह गठबंधन रेडिकल दुश्मनों के खिलाफ होगा। नका इशारा शिया और सुन्नी एक्सिस की तरफ है। यानी आसान शब्दों में कहें तो ईरान और उसके प्रोक्सी गुटों के खिलाफ एक लोहे की दीवार खड़ी करना। नेतन्याहू  ने पीएम मोदी को पर्सनल फ्रेंड कहा है। लेकिन दोस्ती अपनी जगह है और कूटनीति अपनी जगह। किंग कॉलेज लंदन के प्रोफेसर एंड्रियास क्रेक का मानना है कि इजराइल दरअसल खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहा है।

उसे लगता है कि अगर भारत जैसा ग्लोबल पावर उसके साथ खुलकर खड़ा हो गया तो ईरान, तुर्किए और दूसरे दुश्मनों को कड़ा संदेश जाएगा। नेतन्या चाहते हैं कि भारत इस हेक्सागन का एंकर बने। यानी वो धुरी जिसके भरोसे यह पूरा गठबंधन टिका हो। लेकिन यहां भारत के लिए मामला इतना सीधा नहीं है।

Leave a Reply

error: Content is protected !!