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बिहार में खुलेंगे 208 डिग्री कॉलेज

बिहार में खुलेंगे 208 डिग्री कॉलेज

9152 पदों पर भर्ती को मिली मंजूरी

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बिहार सरकार ने उच्च शिक्षा को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए बड़ा निर्णय लिया है. राज्य के उन 208 प्रखंडों में अब नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे, जहां अभी तक एक भी डिग्री कॉलेज नहीं है. सात निश्चय-3 के तहत उन्नत शिक्षा-उज्ज्वल भविष्य योजना के जरिए यह कदम उठाया गया है. सरकार ने कॉलेज खोलने, संचालन शुरू करने और शिक्षकों-कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए मंजूरी दे दी है.

9152 नए पदों को मिली मंजूरी

सरकार ने इन 208 कॉलेजों के लिए कुल 9152 पद सृजित करने की स्वीकृति दी है. इसमें 6656 शिक्षकों के पद और 2496 नॉन-टीचिंग पद शामिल हैं. हर कॉलेज में औसतन 44 पद होंगे. इनमें 32 शिक्षक और 12 नॉन-टीचिंग कर्मचारी तैनात किए जाएंगे. इस पूरी योजना पर सरकार को हर साल लगभग 937 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे.

हर कॉलेज में 16 विषयों की पढ़ाई

नए कॉलेजों में छात्रों को 16 विषयों में पढ़ाई का मौका मिलेगा. इनमें हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान, भूगोल, राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र, गृह विज्ञान, गणित, भौतिकी, रसायनशास्त्र, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, वाणिज्य और पर्यावरण विज्ञान शामिल हैं. हर कॉलेज में एक प्राचार्य भी नियुक्त होगा. ज्यादातर विषयों में दो-दो शिक्षक होंगे.

कॉलेजों में पढ़ाई के साथ प्रशासनिक कामकाज के लिए भी 12 पद बनाए गए हैं. इसमें क्लर्क, पुस्तकाध्यक्ष और अलग-अलग विषयों के लैब इंचार्ज शामिल होंगे. इससे कॉलेजों का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा.

2026-27 सत्र से शुरू होगी पढ़ाई

सरकार ने तय किया है कि नए सत्र 2026-27 से सभी 208 कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी. शुरुआत में छह विषयों हिंदी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास और समाजशास्त्र में एडमिशन होगा. हर विषय में 50 सीटें होंगी यानी हर कॉलेज में शुरुआती दौर में 300 सीटों पर नामांकन लिया जाएगा.

पुराने शिक्षक जाएंगे नए कॉलेज, पुराने संस्थानों में आएंगी गेस्ट फैकल्टी

सरकार ने साफ किया है कि नए कॉलेजों में गेस्ट फैकल्टी नहीं रखी जाएगी. वहां पुराने और अनुभवी शिक्षकों को भेजा जाएगा. जिन कॉलेजों से शिक्षक जाएंगे, वहां खाली पदों पर गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति होगी. यह पूरी प्रक्रिया जुलाई से पहले पूरी करनी होगी.

इस योजना से बिहार के हजारों छात्रों को अपने ही प्रखंड में डिग्री स्तर की पढ़ाई मिलेगी. इससे उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ेगी, खर्च कम होगा और नामांकन दर में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है.

बिहार की सम्राट सरकार ने नए डिग्री कॉलेजों में शिक्षक और नॉन टीचिंग स्टाफ की बहाली की हरी झंडी दे दी है। चयनित कॉलेजों में 16 विषयों की पढ़ाई होगी। इनमें 15 विषयों में दो-दो शिक्षकों की नियुक्ति होगी, जबकि एक विषय में एक ही शिक्षक होंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। इस पर 938 करोड़ रुपये का सालाना आर्थिक बोझ सरकार के खजाने पर पड़ेगा। जल्द ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इस समय बिहार के 208 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने की योजना पर काम चल रहा है। इन प्रखंडों में फिलहाल कोई डिग्री कॉलेज नहीं है। राज्य सरकार ने डिग्री कॉलेज रहित प्रखंडों में कॉलेज खोलने का निर्णय लिया था। इसके बाद इन कॉलेजों में नए सिरे से शिक्षकों एवं शिक्षकेतर कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है।

कुल 9152 पदों पर बहाली

राज्य कैबिनेट से पहले ही इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी है। इसके तहत नए डिग्री कॉलेजों में 9152 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी दोनों शामिल हैं।

हर कॉलेज में 32 टीचर की भर्ती

विभागीय सूचना के अनुसार इन 208 नए डिग्री कॉलेजों में 6656 शिक्षकों की नियुक्ति होगी। हर कॉलेज में 32-32 शिक्षक नियुक्त होंगे। इनमें एक प्रधानाचार्य के अलावा 16 अलग-अलग विषयों के 31 शिक्षक होंगे। इनमें हिन्दी, अंग्रेजी, अर्थशास्त्र, इतिहास, मनोविज्ञान, भूगोल, राजनीति शास्त्र, गृह विज्ञान, समाजशास्त्र, गणित, भौतिकी, रसायन शास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, प्राणी विज्ञान, वाणिज्य में दो-दो जबकि पर्यावरण विज्ञान विषय में एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी।

क्लर्क और लैब इंचार्ज के पदों पर भी भर्ती

इसी तरह सभी कॉलेजों में 2496 शिक्षकेतर कर्मियों की नियुक्त की जाएगी। प्रत्येक कॉलेज में 12-12 शिक्षकेतर कर्मी होंगे। इनमें उच्च वर्गीय लिपिक के एक पद, निम्न वर्गीय लिपिक के तीन पद, सहायक पुस्तकाध्यक्ष के एक पद के अलावा सात लैब इंचार्ज के पद हैं। भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, मनोविज्ञान, भूगोल और गृह विज्ञान में एक-एक लैब इंचार्ज नियुक्त होंगे।

दरअसल, पिछले दिनों समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं। वहां के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए घर से काफी दूर जाना पड़ता है। ऐसे में उन सभी प्रखंडों में डिग्री कॉलेज खोलने का निर्णय लिया गया। समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि सूबे में 534 में से 326 प्रखंडों में तो डिग्री कॉलेज हैं, शेष में नहीं हैं। ऐसे में शेष 208 प्रखंडों में भी उनकी स्थापना का निर्णय लेकर काम प्रारंभ किया गया है।

महालेखाकार को दी गई सूचना के मुताबिक संबंधित 208 डिग्री कॉलेजों में से प्रत्येक में एक प्रधानाचार्य, 16 सहायक प्राध्यापक एवं 12 कर्मचारी होंगे। प्रधानाचार्य का पद वेतन स्तर 14 का होगा। सहायक प्राध्यापक के सभी पद वेतन स्तर 10 के होंगे।

16 सहायक प्राध्यापकों में हिन्दी के दो, अंग्रेजी के दो, अर्थशास्त्र के दो, इतिहास के दो, मनोविज्ञान के दो, भूगोल के दो, राजनीति विज्ञान के दो, समाजशास्त्र के दो, गृहविज्ञान के दो, गणित के दो, भौतिकी के दो, रसायनशास्त्र के दो, वनस्पति विज्ञान के दो, प्राणी विज्ञान के दो, वाणिज्य के दो एवं पर्यावरण विज्ञान के एक सहायक प्राध्यापक प्रत्येक कॉलेज में होंगे।

इसके साथ ही प्रत्येक कॉलेज में होने वाले 12 कर्मचारियों में उच्च वर्गीय लिपिक एक, निम्न वर्गीय लिपिक के तीन, सहायक लाइब्रेरियन के एक एवं लैब इंचार्ज के सात पद होंगे।

जिन सात विषयों में लैब इंचार्ज के एक-एक पद होंगे, उनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, वनस्पति विज्ञान, प्राणी विज्ञान, मनोविज्ञान, भूगोल एवं गृह विज्ञान शामिल हैं। उच्च वर्गीय लिपिक का वेतन स्तर चार होगा। निम्न वर्गीय लिपिक का वेतन स्तर दो होगा। सहायक पुस्तकाध्यक्ष का वेतन स्तर चार होगा। लैब इंचार्य का वेतन स्तर भी चार होगा।

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