मानव तस्करी के पांच वर्ष पुराने मामले में कोर्ट ने लिया संज्ञान
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पोक्सो एक्ट की विशेष अदालत ने मानव तस्करी और पोक्सो एक्ट से संबंधित पांच साल पुराने मामले में दाखिल पूरक चार्जशीट पर संज्ञान लिया है। मामले के अनुसंधान पदाधिकारी ने तीन जनवरी को रंजीत मंडल, अजीत केरकेट्टा उर्फ मथु और रीना केरकेट्टा के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी।
मामले में पहले एक आरोपित लखिंद्र यादव पर पूर्व में ही संज्ञान लिया जा चुका है। अदालत ने जमानत पर चल रही रंजीता मंडल और रीना केरकेट्टा को 30 जनवरी को उपस्थित होने का आदेश दिया है। इस मामले में नामजद आरोपित अफरोज खान की मृत्यु हो जाने के कारण उस पर आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
आर्म्स एक्ट में आरोपित को नहीं मिली जमानत
अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने आर्म्स एक्ट के मामले में आरोपित हरेंद्र कुमार सिंह की जमानत याचिका शनिवार को खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध साक्ष्य जमानत देने के पक्ष में नहीं हैं।
प्रार्थी अवैध हथियार रखने के आरोप में न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने 19 अक्टूबर 2025 की रात वाहन जांच के दौरान इनोवा कार से देशी पिस्तौल और कारतूस बरामद किया था। पुलिस ने आरोपित और उसका चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
अपहरण मामले में आरोपित बरी
अपर न्यायायुक्त एके तिवारी की अदालत ने युवती का अपहरण करने के आरोपित सज्जाद अंसारी को शनिवार को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। सुनवाई के दौरान पीड़िता ने अदालत में बयान दिया कि उसने स्वेच्छा से आरोपित से विवाह किया है और उसे किसी प्रकार की कोई शिकायत नहीं है।
पीड़िता के इस बयान के बाद अदालत ने आरोपित को बरी कर दिया। घटना को लेकर युवती के पिता ने खलारी थाना में 16 अप्रैल 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध सेवानिवृत्ति के बाद चलाए गए अनुशासनिक कार्यवाही को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। Ranchi Highcourt ने प्रार्थी श्याम नाथ दूबे की याचिका पर सुनवाई करते हुए झारखंड सरकार के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके तहत उनकी पेंशन से आजीवन 10 प्रतिशत की कटौती की गई थी।
प्रार्थी श्याम नाथ दूबे जल संसाधन विभाग में सहायक अभियंता थे। उनकी सेवानिवृत्ति (30 जून 2013) के बाद विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। पांच आरोपों में जांच के बाद 21 जुलाई 2015 के आदेश से उनकी Pension में 10 प्रतिशत की कटौती आजीवन कर दी गई। उनकी अपील को भी 18 फरवरी 2021 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन: हाईकोर्ट
सुनवाई के बाद अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल आरोपपत्र (चार्जशीट) के साथ दस्तावेज संलग्न कर देना ही पर्याप्त नहीं है। एक दस्तावेज स्वयं को साबित नहीं करता। जांच अधिकारी के सामने उन दस्तावेजों और उनकी सामग्री को कानूनन साबित करने की प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके लिए गवाहों की जरूरत पड़ सकती है।
इस मामले में राज्य ने स्वीकार किया कि आरोप सिर्फ संलग्न दस्तावेज के आधार पर साबित किए गए और कोई गवाह पेश नहीं किया गया। अदालत ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है।
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, बिना दस्तावेजों को विधि सम्मत तरीके से साबित किए, आरोप सिद्ध नहीं माने जा सकते। अदालत ने 21 जुलाई 2015 के दंडात्मक आदेश और 18 फरवरी 2021 की अपील की अस्वीकृति को निरस्त कर दिया है।
अदालत राज्य सरकार को श्याम नाथ दूबे को सभी संबंधित लाभ, जिसमें ग्रेच्युटी, अवकाश लाभ और पेंशन जल्द से जल्द जारी करने का निर्देश दिया है।

