बंद दरवाजों से खुली सेहत की राह, आयुष्मान आरोग्य मंदिर बना गांव की नई उम्मीद
• जहां कभी पसरा रहता था सन्नाटा, आज वहीं इलाज, भरोसा और मुस्कान का बसेरा
श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर, सारण (बिहार):

कभी जर्जर दीवारों, बंद कमरों और अव्यवस्था की पहचान बन चुके गांव के स्वास्थ्य केंद्र आज नई पहचान गढ़ रहे हैं। जहां पहले लोगों को इलाज के लिए शहर की दौड़ लगानी पड़ती थी, वहीं अब गांव के बीचोंबीच आधुनिक सुविधाओं से लैस आयुष्मान आरोग्य मंदिर ग्रामीणों की सेहत का सबसे बड़ा सहारा बन गया है। सारण जिले में राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) के तहत हुए प्रमाणीकरण ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर ही बदल दी है। साफ-सुथरे भवन, उपलब्ध दवाएं, नियमित जांच, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मरीजों के प्रति बेहतर व्यवहार ने गांव के लोगों का भरोसा दोबारा जीत लिया है।
मांझी प्रखंड के मटियार गांव की रहने वाली सावित्री देवी बताती हैं कि कुछ साल पहले तक यहां इलाज की उम्मीद करना भी मुश्किल था। लोग सोचते थे कि न दवा मिलेगी और न डॉक्टर। ऐसे में मामूली बीमारी होने पर भी छपरा शहर जाना मजबूरी बन जाता था। लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। वह मुस्कुराते हुए कहती हैं पहले लगता था कि यहां इलाज नहीं मिलेगा, इसलिए सीधे शहर जाते थे। अब दवा, जांच और डॉक्टर की सलाह सब गांव में ही मिल जाती है।
152 प्रकार की दवाएं और 14 तरह की जांच की सुविधाएं उपलब्ध
आज आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, बच्चों का टीकाकरण, ब्लड प्रेशर और शुगर जांच, सामान्य बीमारियों का उपचार, टेलीमेडिसिन और स्वास्थ्य परामर्श जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। केंद्र पर लगभग 152 प्रकार की दवाएं और 14 तरह की जांच की सुविधा दी जा रही है। हर महीने करीब 700 से 800 मरीज यहां ओपीडी सेवा का लाभ उठा रहे हैं। 65 वर्षीय रामनारायण प्रसाद बताते हैं कि पहले हर महीने शुगर जांच के लिए शहर जाना पड़ता था। इसमें समय और पैसे दोनों खर्च होते थे। अब गांव में ही जांच और दवा मिलने से काफी राहत मिली है।

सीएचओ प्रियंका कुमारी की भूमिका रही महत्वपूर्ण
इस बदलाव के पीछे आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) की मेहनत भी अहम मानी जा रही है। सीएचओ प्रियंका कुमारी बताती हैं कि एनक्वास प्रमाणीकरण के बाद स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन का तरीका पूरी तरह बदल गया है। उन्होंने कहा, अब हर सेवा का रिकॉर्ड रखा जाता है, नियमित ट्रेनिंग होती है और मरीजों के साथ व्यवहार पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इससे लोगों का भरोसा बढ़ा है और कर्मचारी भी अधिक जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव का असर साफ दिखाई देने लगा है। महिलाएं अब बिना झिझक स्वास्थ्य जांच कराने पहुंच रही हैं, बुजुर्ग नियमित स्वास्थ्य परीक्षण करा रहे हैं और बच्चों का टीकाकरण समय पर हो रहा है।
मांझी सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रोहित कुमार ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब सिर्फ सरकारी भवन नहीं रहे, बल्कि गांव के लोगों के लिए भरोसे, इलाज और उम्मीद का नया केंद्र बन चुके हैं। यह बदलाव साबित करता है कि अगर स्वास्थ्य सेवाओं में गुणवत्ता, निगरानी और प्रतिबद्धता हो, तो गांव की तस्वीर भी बदल सकती है।
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