KBC लॉटरी के बाद अब QR कोड का खेल, जमुई के साइबर अपराधियों के तार फिर जुड़े पाकिस्तान से?
श्रीनारद मीडिया, स्टेट डेस्क:

साइबर अपराध के गढ़ के रूप में बदनाम हो रहे जमुई का नाम एक बार फिर कथित पाकिस्तानी कनेक्शन को लेकर चर्चा में है। 37.40 लाख रुपये की साइबर ठगी से जुड़े मामले की जांच में पुलिस को ऐसे डिजिटल साक्ष्य (सबूत) मिले हैं, जिनके आधार पर जांच का दायरा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क तक पहुंच गया है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, नगर थाना इलाके के दौलतपुर से गिरफ्तार वीरू कुमार से पूछताछ, जब्त मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच के दौरान कुछ ऐसे क्यूआर कोड मिले हैं, जो कथित रूप से पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों के माध्यम से भेजे गए थे। इन डिजिटल इनपुट के सामने आने के बाद पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपर्कों का उद्देश्य क्या था, इनका इस्तेमाल किस तरह किया गया और कहीं यह किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा तो नहीं है। फिलहाल केवल डिजिटल सुराग मिले हैं। इनकी तकनीकी जांच की जा रही है और विभिन्न एजेंसियों से भी आवश्यक सूचनाएं जुटाई जा रही हैं।
जांच पूरी होने के बाद ही किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकेगा। साइबर डीएसपी अभिषेक कुमार का कहना है कि बिना जांच पूरी हुए किसी भी तरह के दावे करना उचित नहीं होगा। गौरतलब है कि साइबर थाना और तकनीकी शाखा की संयुक्त कार्रवाई में वीरू को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, म्यूल खातों के क्यूआर कोड आदि बरामद किए गए थे। इन्हीं डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच के दौरान यह नया पहलू सामने आया है। यह पहला अवसर नहीं है, जब जमुई का नाम कथित पाकिस्तानी कनेक्शन के साथ जुड़ा हो। इससे पहले वर्ष 2022 में पटना से आई एटीएस की टीम ने लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के मंगरार गांव से श्रवण कुमार और अमरजीत सिंह के अलावा झाझा थाना अंतर्गत चांय गांव से रमेश सिंह नामक युवक को गिरफ्तार किया था।
इनके पास 2.82 लाख रुपये नगद, पांच मोबाइल और 10 एटीएम कार्ड बरामद हुए थे। तीनों द्वारा टीवी प्रोग्राम कौन बनेगा करोड़पति के अलावा अन्य लॉटरियों के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करनी का मामला उजागर हुआ था। उस समय की जांच में भी तीनों युवकों का पाकिस्तान कनेक्शन सामने आया था।
अब एक बार फिर साइबर ठगी की जांच में मिले डिजिटल सुरागों ने पुलिस की सतर्कता बढ़ा दी है।फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच, मोबाइल डेटा के विश्लेषण और संदिग्ध संपर्कों की पुष्टि पर है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल डिजिटल संपर्क तक सीमित है या इसके तार वास्तव में किसी अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े हैं।
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