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देश की 60% से अधिक LPG विदेशों से आयात होती है

देश की 60% से अधिक LPG विदेशों से आयात होती है

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भारत में रसोई गैस (LPG) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और अब हर तीन में से दो घरों में खाना बनाने के लिए गैस का उपयोग हो रहा है। साफ ईंधन की दिशा में यह एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ एक बड़ी चुनौती भी जुड़ी है देश की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करना पड़ रहा है, जिससे आपूर्ति जोखिम में रहती है।

भारत में 63% से ज्यादा घर अब एलपीजी या पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) जैसे साफ ईंधन का उपयोग करते हैं। शहरों में यह आंकड़ा लगभग 93% तक पहुंच चुका है, जो ग्रामीण क्षेत्रों के मुकाबले काफी अधिक है।पिछले कुछ वर्षों में एलपीजी की मांग तेजी से बढ़ी है। वित्त वर्ष 2017 के मुकाबले 2025 तक खपत करीब 1.5 गुना बढ़ गई और जनवरी 2026 तक यह 30.8 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गई।

साफ ईंधन का बढ़ता इस्तेमाल

भारत में एलपीजी अभी भी घरेलू ईंधन का सबसे बड़ा स्रोत है। सरकार ने PNG को बढ़ावा देने की कोशिश की है, लेकिन अभी केवल 307 क्षेत्रों में ही इसकी सुविधा उपलब्ध है।

देश में करीब 96.4% यानी 33.2 करोड़ सक्रिय एलपीजी कनेक्शन हैं, जबकि पीएनजी कनेक्शन सिर्फ 4.6% यानी 1.6 करोड़ ही हैं। एलपीजी कनेक्शन में तेजी से बढ़ोतरी का बड़ा कारण प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना है, जो 2016 में शुरू हुई थी और अब इसके 10.3 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं।

आयात पर भारी निर्भरता

हालांकि, घरेलू उत्पादन देश की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का 60% से ज्यादा हिस्सा आयात करता है और इसमें से करीब 90% पश्चिम एशिया से आता है, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचता है।

वित्त वर्ष 2023-24 में 59.2% एलपीजी आयात किया गया, जो 2024-25 में बढ़कर 61.8% हो गया। 2025-26 में भी यह करीब 61.6% बना हुआ है। इसका मतलब है कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर है।

LNG की स्थिति थोड़ी बेहतर

एलएनजी (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) के मामले में स्थिति थोड़ी संतुलित है। भारत जितना एलएनजी आयात करता है, लगभग उतना ही उत्पादन भी करता है। वित्त वर्ष 2025-26 में कुल खपत 58000 MMSCM रही, जिसमें उत्पादन और आयात लगभग बराबर रहा। एलएनजी का 90% से ज्यादा उपयोग सीएनजी और औद्योगिक पीएनजी में होता है। देश में करीब 97 लाख वाहन सीएनजी का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 21000 औद्योगिक कनेक्शन पीएनजी से जुड़े हैं।

क्या है चुनौती?

एलपीजी की बढ़ती मांग और आयात पर निर्भरता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। खासकर जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता है या होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आती है, तो इसका सीधा असर भारत की सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।

रसोई गैस

  • भारत अपनी एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इन आयातों में से लगभग 90 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होता है, जो वर्तमान घटनाओं के कारण प्रभावित हुआ है।
  • मार्च 2026 को सरकार ने एक आदेश जारी कर तेल शोधन संयंत्र और पेट्रोकेमिकल परिसरों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटेन जैसे गैसों को एलपीजी पूल में भेजकर एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करने का निर्देश दिया। इन उपायों के परिणामस्वरूपघरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और संपूर्ण घरेलू एलपीजी उत्पादन घरेलू उपभोक्ताओं की ओर निर्देशित किया जा रहा है।
  • गैर-घरेलू एलपीजी के लिए, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों जैसे आवश्यक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • आईओसीएल, एचपीसीएल और बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशकों की एक तीन सदस्यीय समिति का गठन रेस्तरांहोटल और अन्य वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को किए गए आवंटन की समीक्षा करने और उपलब्ध एलपीजी आपूर्ति के निष्पक्ष और पारदर्शी वितरण को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
  • दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा कीमत हाल ही में हुई ₹60 की बढ़ोतरी के बाद ₹913 है। पीएमयूवाई लाभार्थियों के लिए कीमत ₹613 प्रति सिलेंडर ही बनी हुई है।
  • पीएमयूवाई परिवार के लिए, हालिया वृद्धि प्रति दिन 80 पैसे से भी कम है।
  • हालांकि जुलाई 2023 से सऊदी अनुबंध मूल्य में लगभग 41 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, लेकिन सरकारी समर्थन के कारण इसी अवधि के दौरान पीएमयूवाई मूल्य में लगभग 32 प्रतिशत की गिरावट आई है।
  • सरकार ने एलपीजी की कम वसूली के लिए तेल विपणन कंपनियों को ₹30,000 करोड़ के मुआवजे को मंजूरी दे दी है।
  • जमीनी स्तर पर मिली जानकारी से पता चलता है कि कुछ लोग घबराकर सिलेंडर बुक करा रहे हैं और जमाखोरी कर रहे हैं। हालांकि, घरेलू एलपीजी की सामान्य डिलीवरी प्रक्रिया लगभग 2.5 दिन की ही रहती है और उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि वे सिलेंडर बुक करने में जल्दबाजी न करें।
  • वितरक स्तर पर धोखाधडी को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) प्रणाली को लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ताओं तक विस्तारित किया जा रहा है 
  • मांग प्रबंधन के एक अस्थायी उपाय के रूप में, एलपीजी बुकिंग के बीच न्यूनतम अंतराल को 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।
  • तेल विपणन कंपनियां और प्रवर्तन टीमें वितरकों के लंबित ऑर्डर को निपटाने और सुचारू डिलीवरी सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर समन्वय कर रही हैं।
  • सरकार वैश्विक स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा घरों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।
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