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सीता नवमी आज: माता सीता के प्राकट्य उत्सव पर श्रद्धालुओं में आस्था, व्रत-पूजन से सुख-समृद्धि की कामना

सीता नवमी आज: माता सीता के प्राकट्य उत्सव पर श्रद्धालुओं में आस्था, व्रत-पूजन से सुख-समृद्धि की कामना

श्रीनारद मीडिया, दारौंदा, सीवन, (बिहार)

सीवन जिला सहित दारौंदा प्रखण्ड के विभिन्न में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाई जाने वाली सीता नवमी आज श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जायेगी । यह दिन माता सीता के प्राकट्य उत्सव के रूप में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को माता सीता का अवतरण हुआ था। वे भगवान श्रीराम की अर्धांगिनी तथा मिथिला के राजा जनक की पुत्री थीं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार राजा जनक ने अपनी प्रजा के कल्याण हेतु यज्ञ का आयोजन किया। यज्ञभूमि तैयार करने के लिए वे स्वयं हल चला रहे थे। तभी उनका हल धरती के भीतर रखी एक स्वर्ण डलिया से टकराया। उसमें मिट्टी से लिपटी एक दिव्य और सुंदर कन्या प्राप्त हुई। राजा जनक ने उसे ईश्वर का वरदान मानकर अपनी पुत्री के रूप में स्वीकार किया और उसका नाम सीता रखा।

सीता नवमी के अवसर पर श्रद्धालु माता सीता की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिरों और घरों में भजन-कीर्तन, कथा-श्रवण और व्रत का आयोजन होता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन व्रत रखकर अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सीता नवमी का व्रत रखने से संतान सुख, परिवार में खुशहाली तथा जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है। माता सीता की पूजा से वैवाहिक जीवन में प्रेम, शांति और समर्पण बढ़ता है, वहीं दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।

आस्था और संस्कारों से जुड़ा यह पर्व महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। सीता नवमी केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि नारी शक्ति, धैर्य, त्याग और आदर्श जीवन मूल्यों का प्रतीक भी है।

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