पत्रकारिता का ‘ऑस्कर’:दो भारतीय पत्रकारों ने जीता पुलित्जर
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भारतीय पत्रकार आनंद आर के और सुपर्णा शर्मा को डिजिटल निगरानी और साइबर धोखाधड़ी पर उनके काम के लिये प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। सोमवार को घोषित इस पुरस्कार में आनंद और शर्मा को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग एंड कमेंट्री’ श्रेणी में यह सम्मान मिला। इस पुरस्कार को उन्होंने ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया।
साइबर क्राइम पर रिपोर्टिंग के लिए मिला पुलित्जर पुरस्कार
पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, ‘ट्रैप्ड’ शीर्षक से ब्लूमबर्ग के लिए तैयार की गई यह खबर भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी बयां करती है, जिन्हें जालसाजों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था। तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम से तैयार इस खबर ने डिजिटल निगरानी और साइबर ठगी के बढ़ते वैश्विक खतरे को बेहद प्रभावशाली तरीके से उजागर किया।
पुलित्जर पुरस्कार के बारे में जानें
कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में गिना जाता है। इसे अक्सर पत्रकारिता का “ऑस्कर” भी कहा जाता है। इसकी स्थापना हंगेरियन-अमेरिकी पत्रकार और प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर की वसीयत के बाद 1917 में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य पत्रकारिता, साहित्य, और संगीत रचना में उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करना है। पुलित्जर पुरस्कार कुल 21 श्रेणियों में दिया जाता है, जिन्हें मुख्य रूप से तीन भागों में बांटा जा सकता है: पत्रकारिता, साहित्य और नाटक और संगीत।
पुलित्जर पुरस्कार के विजेता का चुनाव कैसे किया जाता है?
पुलित्जर पुरस्कार के विजेता का चुनाव पुलित्जर प्राइज बोर्ड करता है। यह एक स्वतंत्र बोर्ड होता है, जो सभी प्रतिभागियों का बारीकी से मूल्यांकन करता है। पुरस्कार के रूप में विजेताओं को एक प्रमाणपत्र और 15000 डॉलर की नकद राशि दी जाती है।
पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले भारतीयगोविंद बिहारी लाल पुलित्जर पुरस्कार जीतने वाले पहले भारतीय थे। उन्हें आजादी से पहले 1937 में पुलित्जर पुरस्कार मिला था। इसके बाद 2000 में झुंपा लाहिड़ी को उनकी किताब ‘इंटरप्रेटर ऑफ मैलडीज’ के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला। 2011 में सिद्धार्थ मुखर्जी को उनकी पुस्तक ‘द एम्परर ऑफ ऑल मैलडीज’ के लिए पुलित्जर पुरस्कार दिया गया। 2018-2022 में दानिश सिद्दीकी को फीचर फोटोग्राफी के लिए मरणोपरांत पुलित्जर पुरस्कार से नवाजा गया।
ब्लूमबर्ग की इस विजेता सचित्र रिपोर्ट में लखनऊ की न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. रुचिरा टंडन की दिल दहला देने वाली कहानी को विस्तार से दिखाया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उन्हें 6 दिनों तक एक तरह से नजरबंद रखा और इस दौरान उनके बैंक खातों से करीब 2.8 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. पुलित्जर पुरस्कार समिति ने अपनी घोषणा में कहा कि इस रिपोर्ट सीरीज ने डिजिटल ठगी और निगरानी जैसी बढ़ती वैश्विक समस्याओं को प्रभावी तरीके से उजागर किया है.
आनंद आरके मुंबई के एक जाने-माने इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं, जिन्हें पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं. वहीं, सुपना शर्मा भारत की एक फ्रीलांस खोजी पत्रकार हैं, जो लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दों पर रिपोर्टिंग करती रही हैं.
वहीं, हनोई में रहने वाले पत्रकार अनिरुद्ध घोषाल ने इंटरनेशनल रिपोर्टिंग श्रेणी में पुलित्जर पुरस्कार हासिल किया. उनकी रिपोर्ट अमेरिकी बॉर्डर पेट्रोल की ओर से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा रहे गुप्त निगरानी उपकरणों पर केंद्रित थी. इन उपकरणों को पहले सिलिकॉन वैली में विकसित किया गया और बाद में चीन में और उन्नत बनाया गया. रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि चीन और अन्य देश इन तकनीकों का किस तरह उपयोग कर रहे हैं.
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