क्या है हीट स्ट्रोक? धूप से बचें, पानी पिएं, ढीले कपड़े पहनें
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

हीट स्ट्रोक के मामलों में ‘गोल्डन आवर’ सबसे अहम होता है। यदि इसी दौरान मरीज को तेजी से कूलिंग मिल जाए तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है। गर्मी के दौरान शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना और धूप से बचना सबसे जरूरी है। लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
राष्ट्रीय राजधानी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। चेतावनी है कि दो से तीन दिनों में यह 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाएगा और लू (हीट स्ट्रोक) चलने लगेगी, यलो अलर्ट जारी किया गया है।भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) के अनुसार दिल्ली सहित उत्तर और मध्य भारत में हीटवेव की स्थिति और तेज होने की आशंका है।
ऐसे में हीट स्ट्रोक (लू लगना) का खतरा तेजी से बढ़ गया है, जिसे डॉक्टर एक जानलेवा आपातकाल मानते हैं। उनके अनुसार समय पर पहचान, तुरंत उपचार और सावधानी ही हीट स्ट्रोक से बचाव का सबसे मजबूत उपाय है।
क्या है हीट स्ट्रोक
हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है और शरीर की प्राकृतिक कूलिंग प्रणाली पूरी तरह फेल हो जाती है। इसके लक्षणों में बेहोशी, भ्रम, तेज कमजोरी, त्वचा का गर्म और सूखा होना, उल्टी, चक्कर और दौरे शामिल हैं।
समय पर इलाज न मिलने पर दिमाग, किडनी और लीवर जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। 2025 की गर्मियों में दिल्ली में हीटवेव का असर गंभीर रहा था।स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों से जुड़े अधिकारियों के अनुसार राजधानी में 7,000 से अधिक हीट-रिलेटेड मरीज विभिन्न अस्पतालों में दर्ज किए गए, जिनमें हीट एक्साशन और हीट स्ट्रोक के मामले शामिल थे।
कई मामलों में मौतें भी दर्ज की गईं, हालांकि समेकित आधिकारिक आंकड़ा अब तक जारी नहीं किए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इससे पहले 2024 की भीषण गर्मी के दौरान दिल्ली में 58 के करीब मौत हीटवेव से जुड़ी दर्ज की गई थीं।
- डायनामिक कंपोनेंट: एम्बुलेंस आधारित त्वरित कूलिंग, आइस बाक्स, इनफ्लेटेबल टब और मानिटरिंग उपकरण।
- स्टैटिक कंपोनेंट: कूलिंग टब, आइस मेकिंग सिस्टम, एयर कंडीशनिंग, मल्टीपैरामीटर मानिटर, डिफिब्रिलेशन और 24 घंटे ब्लड बैंक सुविधा।
क्या करें
- मरीज को तुरंत छाया या ठंडी जगह पर ले जाएं
- शरीर को गीला कपड़ा या बर्फ से ठंडा करें
- गर्दन, बगल और जांघों पर ठंडक दें
- होश में हो तो पानी पिलाएं
- तुरंत अस्पताल पहुंचाएं
सावधानी
- दोपहर 12 से 4 बजे के बीच धूप से बचें
- हल्के और ढीले कपड़े पहनें
- पर्याप्त पानी और ओआरएस लेते रहें
- कैफीन और अल्कोहल से बचें
- बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों पर विशेष ध्यान रखें.
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हीट स्ट्रोक (लू लगना) एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जो भीषण गर्मी में शरीर का तापमान से ऊपर जाने पर होती है। इसमें शरीर की गर्मी नियंत्रित करने की क्षमता फेल हो जाती है, जिससे मस्तिष्क और अंगों को नुकसान हो सकता है।
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बचाव के लिए: सुबह 11-4 बजे की तेज धूप से बचें, हर थोड़ी देर में पानी या ORS पिएं, और हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें।Instagram +4हीट स्ट्रोक के मुख्य लक्षण (Symptoms):
- त्वचा का गर्म, लाल और शुष्क होना (पसीना न आना)।
- तेज सिरदर्द, चक्कर आना या बेहोशी।
- भ्रम (Confusion) की स्थिति या अटपटी बातें करना।
बचाव के उपाय (Prevention Tips):- पानी पिएं: प्यास न लगने पर भी पानी, नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी पीते रहें।
- धूप से बचें: दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच बाहर न निकलें।
- ढीले कपड़े: हल्के रंग के सूती और ढीले कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिले।
- सुरक्षा: बाहर निकलते समय टोपी, छाता या चश्मा इस्तेमाल करें।
- खान-पान: हल्का भोजन करें और चाय-कॉफी, शराब से बचें।
प्राथमिक उपचार (First Aid):उससे अधिक बुखार।
- व्यक्ति को तुरंत छांव या ठंडी जगह (AC कमरे) में ले जाएं।
- कपड़े ढीले कर दें या हटा दें।
- शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें या ठंडा पानी छिड़कें।
- तुरंत डॉक्टर को बुलाएं।
