बिहार में सीओ की हड़ताल समाप्त हुई, 4 मई से काम पर लौटेंगे अधिकारी
55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सीओ और राजस्व पदाधिकारियों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई है. बिहार में 55 दिनों से जारी सामूहिक अवकाश के बाद अब सीओ, आरओ समेत सभी हड़ताली अधिकारी फिर से काम पर लौटेंगे. सम्राट चौधरी सरकार के साथ बातचीत में सहमति बनने के बाद बिहार संयुक्त राजस्व सेवा महासंघ ने हड़ताल समाप्त करने का ऐलान कर दिया है. महासंघ की ओर से जारी सूचना के मुताबिक 4 मई से सभी अधिकारी अपने पद पर योगदान देंगे. इस फैसले से पूरे बिहार में जमीन से जुड़े रुके हुए हजारों काम फिर से शुरू हो सकेंगे और आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.
सरकार की चेतावनी के बावजूद भी मांग पर अड़े रहे कर्मी
राज्य के अंचलाधिकारी अपनी कई मांगों को लेकर 9 मार्च से अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए थे. इस दौरान जमीन दाखिल-खारिज, निबंधन, प्रमाण पत्र, दाखिला, म्यूटेशन और कई जरूरी राजस्व कार्य बुरी तरह प्रभावित रहे. सरकार ने कई बार हड़ताल खत्म करने की अपील की थी. पहले विभागीय स्तर पर सख्ती भी दिखाई गई. वेतन रोकने, निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई. कुछ अधिकारी काम पर लौटे, लेकिन बड़ी संख्या में पदाधिकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे.
कैसे खत्म हुआ आंदोलन
हड़ताल का असर सिर्फ जमीन संबंधी कामों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनगणना 2027 की प्रक्रिया पर भी दबाव बढ़ने लगा था. बिहार में जनगणना के पहले चरण के तहत स्व-गणना चल रही है, जबकि 2 मई से घर-घर गणना का काम शुरू होना है. ऐसे में राजस्व विभाग की भूमिका बेहद अहम थी. सरकार पर बढ़ते दबाव के बीच आखिरकार रास्ता निकला और समझौते के बाद आंदोलन खत्म हुआ.
हटाए गए सीके अनिल
हड़ताल खत्म होने से पहले सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को पद से हटा दिया था. उनकी जगह जय सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई. इसे भी हड़ताल खत्म कराने की रणनीति के तौर पर देखा गया. अब 4 मई से अधिकारियों की वापसी के साथ अंचल कार्यालयों में कामकाज सामान्य होने की उम्मीद बढ़ गई है.
55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ
राज्य भर के अंचलाधिकारी (सीओ) अपनी विभिन्न मांगों को लेकर बीते 9 मार्च को अनिश्चितकालीन सामूहिक अवकाश पर चले गए थे। राजस्व इस बीच राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से कई बार उन्हें का काम पर लौटने की अपील की गई। तत्कालीन विभागीय मंत्री सह डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने हड़ताली अफसरों को सैलरी ब्रेक, निलंबन समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी। इसके असर से कुछ अधिकारियों ने हड़ताल खत्म कर दी थी।
हालांकि, बड़ी संख्या में सीओ-आरओ अपनी मांगों पर डटे रहे। इससे अंचलों में जमीन से जुड़े काम प्रभावित हो रहे थे। काम पर नहीं लौटने वाले कुछ अधिकारियों पर विभाग ने ऐक्शन लेकर निलंबित भी किया। इससे सरकार और हड़ताली पदाधिकारियों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा था। साथ ही अंचलों में निबंधन से लेकर जमीन से जुड़े अन्य काम अटक गए थे। राज्य सरकार ने वैकल्पिक उपाय भी अपनाते हुए ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों को अंचलों के अतिरिक्त प्रभार दिए थे। इससे अन्य कर्मचारियों का वर्क लोड बढ़ गया था।
हड़ताल से प्रभावित हो रहा था जनगणना का काम
जनगणना 2027 के पहले चरण की शुरुआत हो चुकी है। अभी स्व-गणना का काम चल रहा है। 2 मई से प्रगणक घर-घर जाकर मकानों की गणना भी करेंगे। बिहार में जनगणना के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। ऐसे में सीओ, आरओ और राजस्व कर्मियों की हड़ताल से जनगणना का काम भी प्रभावित हो रहा था।
55 दिनों बाद काम पर लौटेंगे सीओ
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई एनडीए सरकार ने सुलह का रास्ता निकाल दिया है। बताया जा रहा है कि सरकार की ओर से हड़ताली अधिकारियों को उनकी मांगों पर विचार करने के लिए आश्वासन दिया है। इसके बाद, बिहार संयुक्त सेवा महासंघ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि 4 मई से वे अपना योगदान देंगे। 55 दिनों के बाद सीओ काम पर लौट जाएंगे।
प्रधान सचिव पद से हटाए गए
दो दिन पहले ही सम्राट सरकार ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को हटा दिया था। उनका तबादला बिहार राज्य योजना पर्षद में बतौर परामर्शी (सलाहकार) कर दिया गया था। इसके बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह को प्रधान सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। सीके अनिल के ट्रांसफर के पीछे की मुख्य वजह सीओ-आरओ हड़ताल को ही मानी गई थी। सीके अनिल 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।
