AN-32 विमान 1984 से भारतीय वायुसेना की रीढ़
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सोवियत संघ में निर्मित दो इंजन वाला टर्बोप्रॉप विमान एंटोनोव-32 (AN-32) 1984 में भारतीय वायु सेना (IAF) के परिवहन बेड़े का मुख्य आधार रहा है। 100 से अधिक विमानों के साथ भारत इस बहुमुखी लड़ाकू परिवहन विमान का दुनिया में सबसे बड़ा संचालक है।
इसे विशेष रूप से लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और सियाचिन ग्लेशियर जैसे दुर्गम व पर्वतीय इलाकों में भारी वजन ढोने और मिशनों को अंजाम देने के लिए डिजाइन किया गया है। सोवियत संघ के एंतोनोव डिजाइन ब्यूरो द्वारा विशेष रूप से भारत की जरूरतों के अनुसार तैयार किया गया यह विमान पिछले चार दशकों (तकरीबन 40 साल) से भारतीय वायु सेना की रीढ़ बना हुआ है।
1984 में भारती वायुसेना में हुआ शामिल
एंतोनोव An-32 विमान को भारतीय वायु सेना में आधिकारिक तौर पर साल 1984 में शामिल किया गया था। 1970 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सोवियत संघ के नेता लियोनिद ब्रेझनेव के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों की वजह से इस विमान को खरीदने का सौदा हुआ था।
विमान की खासियत
इस विमान को AN-26 के भरोसेमंद और मजबूत एयरफ्रेम में अधिक शक्तिशाली इंजनों को जोड़कर तैयार किया गया है। यही वजह है कि यह लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश के अत्यधिक ऊंचाई वाले हवाई अड्डों पर भी आसानी से काम कर सकता है।
अपनी इसी खूबी के कारण यह हिमालय और सियाचिन ग्लेशियर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में सैन्य मिशनों के लिए पूरी तरह अनिवार्य बन चुका है।वर्तमान में यह विमान भारतीय वायु सेना की छह प्रमुख स्क्वाड्रनों (12वीं, 25वीं, 33वीं, 43वीं, 48वीं और 49वीं) का हिस्सा है, जिनमें से 49वीं स्क्वाड्रन असम के जोरहाट में तैनात है।
मुख्य कार्य और क्षमताएं
- An-32 विमान बहुआयामी भूमिकाएं निभाता है, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं।
- यह विमान 7.5 टन तक का सैन्य साजो-सामान या माल ढोने में सक्षम है।
- यह एक बार में 50 यात्रियों या 42 पैराट्रूपर्स को ले जा सकता है।
- आपदा राहत और मेडिकल इमरजेंसी में लोगों को सुरक्षित निकालने में इसकी बड़ी भूमिका रहती है।
- यह विमान भारत के ‘ग्रीन एनर्जी मिशन’ का भीहिस्सा रहा है और इसने बायो-जेट ईंधन मिश्रण के साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी है।
आधुनिकीकरण और अपग्रेड कार्यक्रम
विमान की मजबूत बनावट और उपयोगिता को देखते हुए भारतीय वायु सेना ने इसके लिए 40 करोड़ डॉलर का एक व्यापक आधुनिकीकरण कार्यक्रम शुरू किया। इस अपग्रेड के तहत विमान में कई बड़े सुधार किए गए-
- इसकी विमानन नेविगेशन और रडार प्रणालियों को अत्याधुनिक बनाया गया।
- विमान की सेवा अवधि को बढ़ाया गया।
- केबिन के अंदर पायलटों और यात्रियों के आराम में सुधार किया गया।
18 बड़े हादसों का हो चुका है शिकार
हालांकि, अपनी मजबूती और विश्वसनीयता के बावजूद यह विमान 1986 से अब तक 18 बड़े हादसों का शिकार हो चुका है। आज AN-32 परिवहन विमान असम के जोरहाट एयरफोर्स स्टेशन पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया है। यह हादसा तब हुआ जब AN-32 जोरहाट एयरफील्ड पर उतरने की कोशिश कर रहा था। इस हादसे में भारतीय वायु सेना के पांच जवान बलिदान हो गए हैं।
इससे पहले 3 जून 2019 अरुणाचल प्रदेश के पास एक एन-32 विमान लापता हो गया इस दौरान आठ दिन बाद मलबा मिला, जिसमें सभी 13 कर्मी मारे गए। इससे भी इससे पहले 22 जुलाई 2016 को चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा एक विमान 29 कर्मियों के साथ लापता हो गया। वर्षों की खोज के बाद, जनवरी 2024 में बंगाल की खाड़ी में 3,400 मीटर की गहराई पर विमान का मलबा मिला।
