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सेमर का फूल सुंदरता, प्रेम एवं क्षणभंगुरता का प्रतीक है

सेमर का फूल सुंदरता, प्रेम एवं क्षणभंगुरता का प्रतीक है पत्तों से रहित वृक्षों पर फूलने वाला यह सेमर का फूल सटीक समय का सूचक है ” सुंदर होना आवश्यक नहीं, जरूरी है समय पर खिलना।” ✍🏻 राजेश पांडेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क ऋतुओं के राजा बसंत में प्रकृति ने अपना श्रृंगार कर लिया है।…

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जब तक यह संवाद जीवित है, तब तक फगुआ नहीं मरेगा

जब तक यह संवाद जीवित है, तब तक फगुआ नहीं मरेगा फगुआ महज, एक पर्व भर नहीं है, वह लोक के भीतर धड़कती कविता है श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क आज होली है। फागुन की इस दोपहर में कोई पुरानी स्मृति-धुन लौट रही है। हवा में गीले आम्र-मंजरियों की गंध है। कहीं दूर घंटियों की धीमी…

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अफ्रीकन आम एवं लीची पहुंचा सीवान

अफ्रीकन आम एवं लीची पहुंचा सीवान अफ्रिका महादेश में मेडागास्कर देश से यह आम आया है ✍🏻 राजेश पाण्डेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क जी नमस्कार। हां आप ठीक आकलन कर रहे है। यह आम ही है लेकिन यह पिछले मौसम का आम नहीं है बल्कि अभी एक हफ्ते पहले यह पेड़ से तोड़ा गया है।…

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‘उतरी हुई नदी का पानी’ : जीवन-दृष्टि से ओतप्रोत गीत

‘उतरी हुई नदी का पानी’ : जीवन-दृष्टि से ओतप्रोत गीत पुस्तक के रचनाकार सुनील कुमार तंग उर्फ तंग इनायतपुरी है ✍🏻 डॉ० विनय कुमार सिंह श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क प्रकाशन के क्षेत्र में प्रतिवर्ष हिंदी पद्य में सैकड़ों पुस्तकें प्रकाशित होती हैं, जिनमें कुछ ही अपनी विधा की प्रतिनिधि पुस्तकों में एक होती हैं। 2025…

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‘पुराने गीतों का दौर-ए-जमाना’

‘पुराने गीतों का दौर-ए-जमाना’ श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क हमलोग भी तो उस ‘दौर-ए-दिल’ के दीवाने हैं! जिस दौर ने बहुतेरे दिलों को लूटा..! तभी तो यह गीत बना-दिल के टुकड़े हजार हुए,कोई यहां गिरा,कोई वहां गिरा..! लेकिन,आज तो उल्फत के दिल में ही नफ़रत समायी है! क्योंकि,अब स्वार्थ रहित इश्क भी कोई कहां किसी से…

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विश्व हिंदी दिवस और वेनेजुएला संकट

विश्व हिंदी दिवस और वेनेजुएला संकट हिंदी पारंपरिक ज्ञान की वाहक होने के साथ-साथ तकनीकी नवाचारों में भी सक्षम है विश्व अभिभावक की भूमिका संदिग्ध संयुक्त राष्ट्र संघ हुआ उभयलिंगी ✍🏻 राजेश पाण्डेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क भारत पूरे विश्व में प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मानता है। इस वर्ष विश्व हिंदी…

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ज्ञान रंजन@असुविधा का अवशेष

ज्ञान रंजन@असुविधा का अवशेष श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क ज्ञान रंजन के न रहने की सूचना किसी एक व्यक्ति के जाने की सूचना नहीं है, यह उस बेचैन चेतना के ठहर जाने की ख़बर है जो हिंदी कथा-साहित्य में लगातार प्रश्न करती हुई चलती रही। यह जाना एक देह का जाना है पर देह के साथ…

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भोजपुरी के संवर्द्धन हेतु राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान दिया जायेगा

भोजपुरी के संवर्द्धन हेतु राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान दिया जायेगा श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क लोकभाषा भोजपुरी के संवर्द्धन हेतु तथागत संस्था के संरक्षक डॉ. एन.पी. सिंह, आई.ए.एस. (सेवानिवृत्त) एवं कार्यकारी अध्यक्ष, भारतीय शिक्षा बोर्ड ने के मशहूर साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन के नाम पर “राहुल सांकृत्यायन लोकभाषा भोजपुरी तथागत सम्मान” आरंभ करने का निर्णय…

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 दलित साहित्य पर एक नई किताब

दलित साहित्य पर एक नई किताब ‘चिंतन की परम्परा और दलित साहित्य’ संपादक -श्यौराज सिंह बेचैन व देवेंद्र चौबे श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क ‘चिंतन की परंपरा और दलित साहित्य’ दलित साहित्य, इतिहास, समाज, संस्कृति, पाठ और प्रक्रियाओं को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार ग्रंथ हैं। अपने परिवेश को लेकर मनुष्य प्रारंभ से ही संवेदनशील…

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 आलोचना की एक नई पुस्तक ,आलोचना के क्षितिज @2025 श्रृंखला संपादक-पल्लव

 आलोचना की एक नई पुस्तक ,आलोचना के क्षितिज @2025 श्रृंखला संपादक-पल्लव श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क समकालीन हिंदी आलोचना पर केंद्रित हिंदी आलोचकों की यह एक महत्वपूर्ण श्रृंखला पुस्तक हैं। युवा आलोचक पल्लव ने इस श्रृंखला में हिंदी के दस आलोचकों को शामिल किया हैं जिनके बहाने हिंदी की समकालीन आलोचना का परिदृश्य बनता हैं। स्त्री…

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अब नया वर्ष आवाज़ दे रहा है

अब नया वर्ष आवाज़ दे रहा है श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क वर्ष 2025 ढल गया। यह वर्ष भी अपनी सारी उजास और छाया संग समय की निस्तब्ध गोद में समा गया। हमने कितनी दृश्यावली देखी। हँसी की उजली लहरें, चिंता के गहरे बादल, आशा के छोटे दीप। थकान की लंबी शामें। सब कुछ घटा। फिर सब…

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विश्व पुस्तक मेले की चहल-पहल में ‘मसरखिया मेल’ अब  शामिल होने जा रही है

विश्व पुस्तक मेले की चहल-पहल में ‘मसरखिया मेल’ अब  शामिल होने जा रही है श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क मुँह दिखाई तो हो ही जाए। ‘मसरखिया मेल’ अब विश्व पुस्तक मेले की चहल-पहल में शामिल होने आ रही है। टिकट कंफर्म है। प्रकाशक की मुहर लग चुकी है। इसकी मंज़िल अब आप पाठकों की हथेलियाँ हैं।…

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दाढ़ी बाबा की प्रतिमा पर प्रत्येक दिन माल्यार्पण होना चाहिए- प्रो. प्रर्मेद्र कुमार वाजपेयी, कुलपति

दाढ़ी बाबा की प्रतिमा पर प्रत्येक दिन माल्यार्पण होना चाहिए- प्रो. प्रर्मेद्र कुमार वाजपेयी, कुलपति डी.ए.वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में दाढ़ी बाबा की 143वीं जयंती मनाई गई ✍🏻 राजेश पाण्डेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क सीवान नगर स्थित स्थानीय डी.ए.वी स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्वर्गीय वैधनाथ प्रसाद उर्फ दाढ़ी बाबा की 143वीं जन्मजयंती मनाई गई। महाविद्यालय के परिसर…

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यह वह देश तो नहीं,मॉरीशस: एक सामाजिक यात्रा

यह वह देश तो नहीं,मॉरीशस: एक सामाजिक यात्रा पुस्तक के लेखक देवेंद्र चौबे सर जेएनयू के भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी के प्रोफ़ेसर है श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क “वह एक अद्भुत समय था,जब अफ्रीकी महाद्वीप के एक टापू पर गिरमिटिया मज़दूरों ने उगाई भविष्य की फसलें। अपने होने और अपनी मातृभाषा के गीत गाये- –…

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