श्रीराम कथा में पंच पल्लव के पौधों के वितरण के साथ उनकी सेवा का भी दिलाया जाएगा संकल्प
वी एम इंटर कॉलेज, के प्रांगण में 08 से 16 मार्च पूज्य राजन जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा का होगा आयोजन
श्रद्धालुगण में पर्यावरण बोध को भी किया जाएगा जागृत
✍️गणेश दत्त पाठक
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

सुन्दर वन कुसमित अति सोभा।
गुंजत मधुप निकर मधु लोभा।।
कंद मूल फल पत्र सुहाए।
ते भए बहुत तग ते प्रभु आए।।
(भावार्थ: वन फूल-फल से लदे हैं, जहाँ प्रभु के आने से अधिक सुंदरता और समृद्धि आ गई है।)
सिवान। सनातनी परम्परा में सृष्टि को सबसे महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। आज के जलवायु परिवर्तन और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के संदर्भ में पर्यावरण का अवनयन मानव समुदाय के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हमारे सनातन परम्परा के संस्कार सदियों से सृष्टि के संरक्षण का संदेश देते रहे हैं। वी एम इंटर कॉलेज के प्रांगण में 8 मार्च से 16 मार्च 2026 तक होने वाली पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से होने वाली संगीतमय, लालित्यपूर्ण श्रीराम कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालुजनों को जहां सृष्टि के संरक्षण में सहभागिता का संदेश दिया जाना है वहीं सनातनी परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण पंच पल्लव के पौधे सिर्फ वितरित ही नहीं किए जायेंगे अपितु उन पौधों की सेवा और संरक्षण का संकल्प भी कराया जाएगा।
सुमन वाटिका सबहिं लगाईं।
विबिध भाँति करि जतन बनाई।।
लता ललित बहु जाति सुहाई।
फूलहिं सदा बसंत की नाईं।।
(भावार्थ: अयोध्या में सभी ने बहुत जतन से बगीचे लगाए हैं, जहाँ अनेक प्रकार की सुंदर लताएं बसंत ऋतु की तरह सदा फूलती रहती हैं।)
क्या है सृष्टि और उसका महत्व

सनातनी परंपरा में जीवन के उत्पत्ति और विकास की कहानी सृष्टि के महत्व को समाहित और समावेशित करती है। सनातनी परंपरा के अनुसार ब्रह्म एक अनंत और अपरिवर्तनशील सत्य है, जो सृष्टि का मूल है। प्रकृति ब्रह्म की शक्ति है, जो सृष्टि की उत्पति और विकास के लिए जिम्मेदार है। मानव समुदाय यानी पुरुष प्रकृति का साथी है, जो सृष्टि की उत्पति और विकास में मदद करता है। सृष्टि की उत्पति ब्रह्म, प्रकृति और पुरुष के संयोग से होती है और हमारा जीवन इसी सृष्टि का एक हिस्सा है। सृष्टि के संरक्षण के संदर्भ में वृक्षों का महत्व एक सार्वभौमिक और वैज्ञानिक तथ्य है।
ये होते हैं पंच पल्लव…
सनातनी परंपरा में पंच पल्लव वाले वृक्ष को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। पंच पल्लव में पांच वृक्षों के पत्तों यथा आम्र, पीपल, बरगद(नग्रोद), पाखर (प्लक्ष), गुलर(ओदुंबर) को शामिल किया जाता है। ये वृक्ष पर्यावरण के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका को निभाने के साथ विभिन्न बौद्धिक आयामों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। यथा आम (आम्र) शुभता और पवित्रता का, पीपल (अश्वत्थ) दीर्घायु और दिव्यता का, बड़/बरगद (नग्रोद): अमरता और स्थिरता का, पाखर (प्लक्ष) सौभाग्य का, गूलर (ओदुंबर): आरोग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। ऐसे में जब हम पंच पल्लव की बात करते हैं तो ये जीवन के विविध सकारात्मक आयामों को समाविष्ट भी करते हैं। किसी भी प्रकार का धार्मिक कार्य हो, उसमें इन पंच पल्लव को कलश में रखकर स्थापित किया जाता है। तो वहीं पूजा के साथ साथ सनातन धर्म में होने वाले अन्य मांगलिक कार्यों में इनका विभिन्न प्रकार से उपयोग होता है।
चित्रकूट प्रसंग में भगवान श्रीराम करते थे पंच पल्लव से पूजा
श्री राम कथा के दौरान पूज्य राजन जी महाराज विशेषकर वनवास के क्रम में और चित्रकूट में भगवान श्रीराम द्वारा पंच पल्लव के उपयोग का जिक्र जब संगीतमय श्रीराम कथा के दौरान करते हैं तो श्रद्धालुजन सिर्फ पर्यावरण बोध से परिचित ही नहीं होते अपितु सृष्टि के संरक्षण के प्रति संकल्पित और प्रेरित भी होते हैं।
चित्रकूट गिरि करहु निवासू।
तहँ तुम्हार सब भाँति सुपासू॥
सैलु सुहावन कानन चारू।
करि केहरि मृग बिहग बिहारू॥
पंच पल्लव पौधों के संरक्षण का लेना होगा संकल्प भी
सिवान के वी एम इंटर कॉलेज के प्रांगण में जब पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा 8 मार्च से 16 मार्च तक होनी है तो इस दौरान उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं के पर्यावरण बोध को जागृत करने के साथ उन्हें सृष्टि के संरक्षण में सहभागिता निभाने हेतु प्रेरित भी किया जाना है। श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार ने संयुक्त रूप से बताया कि श्री राम कथा के दौरान कुछ श्रद्धालुओं को पंच पल्लव के वृक्षों को दिया जाएगा। ये पौधे उन्हीं श्रद्धालुओं को दिए जाएंगे, जो इन पौधों की कम से कम तीन साल की सेवा का संकल्प लेंगे। इसके लिए पंजीयन श्री राम कथा आयोजन समिति के पास कराना अनिवार्य होगा।

श्री राम कथा के दौरान पर्यावरण बोध का होगा जागरण भी
पूज्य राजन जी महाराज स्वयं रेनूआ मंदिर और भरौली मठ परिसर में पंच पल्लव से जुड़े कुछ पौधों का रोपण भी करेंगे। साथ ही कथा के दौरान श्रद्धालुगण में पर्यावरण बोध जागृत करने के प्रयास भी होंगे। श्री राम कथा आयोजन समिति सभी श्रद्धालुओं से निवेदन कर रही है कि पूज्य राजन जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा का श्रवण करने 8 से 16 मार्च तक अवश्य वी एम उच्च विद्यालय के प्रांगण में अवश्य पहुंचे और आध्यात्मिक आनंद को उठाएं।
