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सीवान मे अवस्थित प्रतिष्ठित डी.ए.वी. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामानंद राम का हुआ स्थानांतरण

सीवान मे अवस्थित प्रतिष्ठित डी.ए.वी. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रामानंद राम का हुआ स्थानांतरण  प्राचार्य डॉ रामानंद राम के साथ कई प्राध्यापक भी बदले गए  कुलपति के आदेश पर अलग अलग तीन कमेटी गठित की गई थी श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क डीएवी पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. रामानंद राम का स्थानांतरण पीसी विज्ञान कॉलेज छपरा…

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हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे होने पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में होगी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी

हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष पूरे होने पर छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर में होगी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी सीवान रहवासी शोधार्थी राजेश पाण्डेय अपने शोध पत्र का करेंगे वाचन उदंत मार्तंड से ए.आई. युग की तकनीक पत्रकारिता पर होगा महासंवाद श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क हिंदी पत्रकारिता के दो वर्ष पूरे होने पर 11-12 अप्रैल…

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सभ्यता बनाम सत्ता का उन्माद

सभ्यता बनाम सत्ता का उन्माद श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क इतिहास का एक अजीब स्वभाव है—वह हर बार अपने सबसे खतरनाक वाक्य किसी नेता के मुँह से कहलवाता है और फिर चुपचाप पीछे हटकर देखता है कि मनुष्य अपनी ही बनाई हुई आग में कितनी देर तक खड़ा रह सकता है। इस समय भी वही दृश्य…

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संवेदना सच्ची हो तो हृदय में उतर जाती है- राहुलजी 

संवेदना सच्ची हो तो हृदय में उतर जाती है- राहुलजी  राहुल सांकृत्यायन की जयंती पर विशेष महापंडित राहुल सांकृत्यायन 9 अप्रैल 1893 — 14 अप्रैल 1963 श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क संविधानसभा ने अपने सच्चे हृदय और विवेक से भारत के भविष्य के लिये लोकतन्त्र के मार्ग का वरण किया था, किन्तु महात्मागान्धी की मृत्यु के…

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उपन्यास वास्तविकता से रूबरू करवाता है

उपन्यास वास्तविकता से रूबरू करवाता है श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क फ्रेंज काफ्का की उपन्यास ‘द मेटामॉर्फोसिस ‘ पढ़ी। ये किताब मेरे पास काफी दिनों से रखी थी लेकिन मैं इसे पूरीतरह भूल चुकी थी। मै ज्यादातर हिंदी नॉवेल्स पढ़ती हूं क्योंकि ये समझने में आसान होती हैं और किसी शब्द पर आपको रुकना नहीं पड़ता।…

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राहुल सांकृत्यायन का किसान आंदोलन

राहुल सांकृत्यायन का किसान आंदोलन जन्मदिन पर विशेष श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क स्वतन्त्रता संग्राम के समय दो विचारधाराएं सक्रिय थीं। एक पहली विचारधारा के अनुसार अँग्रेजों को भारत से भगाना एक मात्र लक्ष्य था । दूसरे किसी भी समस्या को उठाना कतई स्वीकार नहीं था। दूसरी विचारधारा के लोग न सिर्फ अँग्रेजों को भगाने के…

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“गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती”

“गांव की मिट्टी मिटने नहीं देती” श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क एक लड़के की जिंदगी का सफर एक गांव से शुरू होता है, जे एन यू और यूपीएससी की तैयारी की रहस्यमय दुनिया में विचरित कर, फिर वह अमेरिका में मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर एक प्रतिष्ठित मुकाम हासिल करता है। लेकिन अपने दिल में गांव…

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पुस्तक के स्वरूप में अपने भाव को व्यक्त करना कठिन कार्य है

पुस्तक के स्वरूप में अपने भाव को व्यक्त करना कठिन कार्य है संतानंद मिश्र जी ने अपनी पुस्तक के माध्यम से नई पीढ़ी को उपकृत किया है गांव एवं इसकी मिट्टी हमारे संस्कृतिक बोध की मूल है ✍🏻 राजेश पाण्डेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क “अल्प हुआ तो क्या हुआ जैसे आंसू एक समन्दर जैसा स्वाद…

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पीएचडी मेरे लिए कोई अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी का प्रारंभ है-प्रफुल्ल राज पांडेय

पीएचडी मेरे लिए कोई अंत नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी का प्रारंभ है-प्रफुल्ल राज पांडेय श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क आज का यह क्षण मेरे जीवन के उन दुर्लभ पलों में से है, जहाँ मन भावनाओं से भरा है, आँखें नम हैं और हृदय कृतज्ञता से झुका हुआ है। वर्षों की साधना, संघर्ष, धैर्य, आत्मसंयम और…

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निर्मल वर्मा: सूक्ष्मता की भाषा और अंत:सलिला भारतीयता

निर्मल वर्मा: सूक्ष्मता की भाषा और अंत:सलिला भारतीयता जयंती पर विशेष श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क निर्मल वर्मा का नाम लेते ही हिंदी गद्य में एक ऐसी ध्वनि सुनाई देती है जो बहुत धीमी है, लगभग फुसफुसाहट लेकिन वही सबसे अधिक देर तक भीतर गूँजती रहती है। वे उन लेखकों में नहीं हैं जो पाठक को…

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फेंनुस : स्वाद से स्मृति तक

फेंनुस : स्वाद से स्मृति तक श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क आज सुबह एक तस्वीर दिखी। ट्वीटर पर। किसी ने पूछा था। “यह क्या चीज है?” देखा। ठिठक गया। सहसा मन, स्मृति के किसी सघन वन में उतर गया। बचपन के दिन बाइस्कोप-से खुलने लगे। सीन-दर-सीन। वह तस्वीर फेंनुस की थी। वही, जिसे कहीं ‘फेंनसा’ कहते…

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अमरीका~इज़राइल व ईरान युद्ध की खबर व विश्लेषण को भारत के न्यूज़ चैनल हद से ज्यादा प्राथमिकता के साथ क्यों दिखा रहे ?

अमरीका~इज़राइल व ईरान युद्ध की खबर व विश्लेषण को भारत के न्यूज़ चैनल हद से ज्यादा प्राथमिकता के साथ क्यों दिखा रहे ? श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क टेलीविज़न स्क्रीन पर युद्ध की चमक हमेशा वास्तविक युद्ध से ज़्यादा आकर्षक होती है। दूर कहीं बम गिरता है और यहाँ स्टूडियो में एंकर की आवाज़ ऊँची हो…

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बुकर 2026 के लिए भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन हुईं शार्टलिस्ट

बुकर 2026 के लिए भारतीय मूल की पद्मा विश्वनाथन हुईं शार्टलिस्ट श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क भारतीय मूल की कनाडाई-अमेरिकी लेखिका और अनुवादक पद्मा विश्वनाथन को इंटरनेशनल बुकर प्राइज 2026 की शार्टलिस्ट में जगह मिली है। उन्हें ब्राजील की लेखिका एना पाउला माया की पुर्तगाली नोवेल आन अर्थ एज इट इज बिनीथ के अंग्रेजी अनुवाद के…

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हँसी के बहाने: मूर्खता का सौन्दर्य

हँसी के बहाने: मूर्खता का सौन्दर्य अप्रैल फूल पर विशेष आलेख श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क मनुष्य के इतिहास में जितनी गंभीर घटनाएँ दर्ज हैं, उतनी ही चुपचाप उसके भीतर एक हल्की, लगभग अदृश्य-सी हँसी भी बहती रहती है—जैसे किसी पुरानी नदी के तल में बचा हुआ पानी। उसी हँसी का एक दिन है, जब मनुष्य…

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