पकड़ौवा बियाह:सामाजिक दबाव का पुराना संस्करण
पकड़ौवा बियाह:सामाजिक दबाव का पुराना संस्करण श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क पकड़ौवा बियाह… नाम सुनते ही जो मासूम-सा रोमांच पैदा होता है, वह दो सेकंड में ही समझदार व्यक्ति के चेहरे पर “अच्छा, ये भी एक सामाजिक व्यवस्था है?” वाली अभिव्यक्ति में बदल जाता है। प्रेमकथाओं की दुनिया में जहां लोग एक-दूसरे को देखकर कविता लिख…
