किसने दिया बैन लगाने का हक?
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप पर जोरदार हमला बोला है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने अल जजीरा की एक रिपोर्ट के आधार पर बताया कि पेजेश्कियन का कहना है कि ट्रंप के पास ईरान को उसके परमाणु अधिकारों से वंचित करने का कोई आधार नहीं है. ईरानी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दों को लेकर मतभेद लगातार गहरा रहे हैं.
पेजेश्कियन ने कहा- ट्रंप को बैन लगाने का किसने दिया अधिकार?
ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा- ट्रंप कहते हैं ईरान अपने परमाणु अधिकारों का उपयोग नहीं कर सकता, लेकिन यह नहीं बताते कि किस अपराध के लिए? वह किसी देश को उसके अधिकारों से वंचित करने वाले कौन होते हैं? वाशिंगटन के पास एक स्वतंत्र देश को उसके तकनीकी अधिकारों से रोकने के प्रयास का कोई वैध आधार नहीं है.
ईरान और अमेरिकी में जारी है वार-पलटवार
होर्मुज पर नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तेहरान और अमेरिका में तनाव चरम पर है. दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहने के कारण राजनयिक गतिरोध भी जारी है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान परमाणु मामले में किसी भी बाहरी देश के दवाब में नहीं आने का संकेत दे रहा है. ईरान की नीति से भी साफ हो रहा है कि वो झुकने को तैयार नहीं है.
होर्मुज को ईरान ने दोबारा बंद किया
अमेरिका से जारी विवाद के बीच ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया. शनिवार को ईरानी सेना ने वहां से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर गोलीबारी की. रिवॉल्यूशनरी गार्ड की गोलीबारी की खबरों के बाद दो भारतीय जहाजों को अपना रूट बदलना पड़ा. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा है कि होर्मुज पर नियंत्रण पहले जैसी स्थिति में लौट आया है. सशस्त्र बलों के सख्त प्रबंधन और नियंत्रण में… ईरान ने चेतावनी दी कि जब तक ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी रहेगी, तब तक वह होर्मुज में आवागमन पर रोक जारी रखेगा. इससे पहले इजराइल-लेबनान के बीच हुए सीजफायर के बाद ईरान ने होर्मुज को पूरी तरह खोलने का ऐलान किया था, लेकिन बाद में फिर से आवाजाही को अवरुद्ध कर दिया.
अमेरिका ने भी जारी रखी है नाकाबंदी
ईरान की तरह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने भी नाकाबंदी पूरी तरह खोलने की बात कही थी, लेकिन उसे अमल नहीं किया. ट्रंप ने कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम समेत किसी भी मुद्दे पर समझौता होने तक ईरान चाहे जो भी करे, अमेरिकी नाकेबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि सोमवार से शुरू हुई नाकेबंदी के बाद से अमेरिकी बल ने 21 जहाजों को वापस ईरान भेजा है.
कहां तक पहुंची समझौते की बात?
होर्मुज को लेकर ईरान अमेरिका में तनातनी जारी है. इस बीच शांति और बातचीत के रास्ते भी तलाशे जा रहे हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका और ईरान 22 अप्रैल की युद्धविराम समय सीमा से पहले एक समझौते के करीब पहुंच रहे हैं. हाल में ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हुए तेहरान की यात्रा की थी, उन्होंने ईरान को नया अमेरिकी प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसकी ईरान समीक्षा कर रहा है.
हालांकि ईरान ने इतना साफ कर दिया है कि आगे की बातचीत के लिए अमेरिका अपनी कुछ मांगों को छोड़ना होगा. वहीं ईरान अमेरिका के बीच दूसरे दौर की बातचीत कब और कहां होगी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. पहले दौर की बातचीत (11 और 12 अप्रैल) पाकिस्तान में हुई थी जो फेल हो गई.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कल पत्रकारों से बात करते हुए कई तरह के बयान दिए और बातचीत की प्रगति को लेकर सकारात्मक रवैया अख़्तियार किया.उन्होंने कहा कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) नहीं करेगा और उसने अपने उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने पर सहमति जताई है.
हालांकि, उनके इन सभी दावों को ईरान की संसद के स्पीकर बग़र ग़ालिबाफ़ ने खारिज कर दिया. उनका कहना था कि ट्रंप ने “एक घंटे में सात दावे किए, और सभी सात गलत थे.”
विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पहले यह घोषणा की थी कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह खुला है, लेकिन बाद में इसे साफ़ करते हुए ईरान ने कहा कि तेल टैंकरों और जहाज़ों को ईरान के तय और नियंत्रित रास्तों से ही गुजरना होगा.इसके बाद ईरान की सेना ने, सरकारी मीडिया के हवाले से, कहा है कि वह होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण फिर से स्थापित कर रही है.
फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी, जो इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जुड़ी है, साथ ही ईरानियन स्टूडेंट्स न्यूज़ एजेंसी और सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने आईआरजीसी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि होर्मुज़ को “उसकी पहले वाली स्थिति” में लौटाया जाएगा, जहां सशस्त्र बल इस क्षेत्र को नियंत्रित करेंगे.
इससे पहले कुछ जहाज़ों को इस जलमार्ग से गुजरते हुए देखा गया था, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इस अहम समुद्री मार्ग से कितना यातायात वास्तव में हो पाया है.
आईआरजीसी के बयान में अमेरिका पर “समुद्री डकैती” (पायरेसी) का आरोप लगाया गया है और कहा गया है कि उसकी तथाकथित “नौसैनिक नाकेबंदी” दरअसल समुद्री लूट के बराबर है.
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर अमेरिका उसके बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखता है, तो वह इस स्ट्रेट (जलडमरूमध्य) को बंद कर सकता है.
