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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है,क्यों?

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है,क्यों?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

अमेरिका और ईरान के बीच एकबार फिर तनाव की लपटें उठीं हैं। इस बीच दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान पर हमला कर सकता है। हालांकि व्हाइट हाउस और पेंटागन की ओर से इस बाबत कोई बयान नहीं जारी किया गया है।

CNN और CBS की रिपोर्ट के मुताबिक, US मिलिट्री इस वीकेंड तक ईरान पर हमला करने के लिए तैयार है। हालांकि प्रेसिडेंट डोनल्ड ट्रंप ने अभी तक इस बारे में कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है कि वह खामेनई प्रशासन के खिलाफ हमले करेंगे या नहीं।

जंगी जहाज, फाइटर जेट तैनात

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना इस हमले के लिए पूरी तरह से तैयार है। यूएस आर्मी जंगी जहाज, फाइटर जेट और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को तैनात कर चुकी है।

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस को बताया गया है कि मिलिट्री वीकेंड तक हमले के लिए तैयार है, लेकिन ट्रंप को अभी भी यकीन नहीं है कि यह सबसे अच्छा तरीका है। रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकन कमांडर-इन-चीफ ने अकेले में मिलिट्री एक्शन के पक्ष और विपक्ष में बहस की है और सबसे अच्छे एक्शन के बारे में सलाहकारों और साथियों से राय ली है।

ट्रंप ने तेहरान को बार-बार धमकी दी है कि अगर चल रही बातचीत में उस न्यूक्लियर डील की जगह कोई और डील नहीं बनती जिसे अमेरिकी प्रेसिडेंट ने 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान तोड़ दिया था, तो वे आगे मिलिट्री एक्शन लेंगे।

अमेरिकी मिलिट्री की हमले के लिए तैयार?

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, वाशिंगटन के पास अभी मिडिल ईस्ट में 13 वॉरशिप हैं। USS गेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर अभी अटलांटिक महासागर में कैरिबियन से मिडिल ईस्ट के रास्ते में है, जिसे इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने वहां जाने का आदेश दिया था। इसके साथ तीन डिस्ट्रॉयर हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता जारी रहने के बावजूद, ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी तेज कर रहा है।एक्सियोस की एक विशेष रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यदि बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका-इजरायल संयुक्त अभियान शुरू हो सकता है, जो पिछले जून में हुए 12 दिवसीय हमले से कहीं अधिक व्यापक और लंबा होगा। यह अभियान ईरानी परमाणु, मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ शासन के लिए अस्तित्व का खतरा पैदा कर सकता है।

एक ट्रंप सलाहकार ने एक्सियोस को बताया, “बॉस (ट्रंप) तंग आ चुके हैं। उनके आसपास के कुछ लोग युद्ध के खिलाफ चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन मुझे लगता है कि अगले कुछ हफ्तों में काइनेटिक एक्शन (सैन्य कार्रवाई) की 90 प्रतिशत संभावना है।” रिपोर्ट में कहा गया है कि यह अभियान छोटे लक्षित हमलों की बजाय “विशाल, कई हफ्तों तक चलने वाला” होगा, जो वेनेजुएला में हालिया पिनपॉइंट ऑपरेशन से अलग होगा।

अमेरिकी सैन्य जमावड़ा तेज

  • पिछले 24 घंटों में 50 से अधिक लड़ाकू विमान (एफ-35, एफ-22, एफ-16 सहित) पश्चिम एशिया पहुंचे हैं।
  • दो विमानवाहक पोत—यूएसएस अब्राहम लिंकन (अरब सागर में तैनात) और यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड (क्षेत्र की ओर रवाना)—क्षेत्र में मौजूद हैं।
  • दर्जनों युद्धपोत, एमक्यू-9 रीपर ड्रोन, ए-10सी थंडरबोल्ट II और अन्य निगरानी विमान (ई-3 सेंट्री, पी-8 पोसाइडन) तैनात किए गए हैं।
  • उपग्रह छवियों में यूएसएस डेलबर्ट डी ब्लैक जैसे विध्वंसक लाल सागर की ओर बढ़ते दिखे हैं।

ट्रंप ने दिया था अल्टीमेटम

ट्रंप ने दो सप्ताह का अल्टीमेटम दिया था, जिसमें ईरान को विस्तृत प्रस्ताव पेश करने को कहा गया है। हालांकि, जिनेवा में जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से तीन घंटे की बैठक के बाद भी दोनों पक्षों में बड़े मतभेद बने हुए हैं। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने फॉक्स न्यूज को बताया कि ट्रंप ने कुछ “रेड लाइन्स” तय की हैं, जिन्हें ईरान मानने को तैयार नहीं है।

इजरायल भी युद्ध की तैयारी में: इजरायली अधिकारियों ने बताया कि सरकार “कुछ दिनों” में युद्ध की स्थिति में है और अधिकतमवादी परिदृश्य (शासन परिवर्तन सहित) पर जोर दे रही है।

ट्रंप प्रशासन दोहरी रणनीति पर: एक तरफ परमाणु वार्ता जारी, दूसरी तरफ सैन्य दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए मजबूर करना। यदि समझौता नहीं हुआ, तो ट्रंप के शेष कार्यकाल पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। कांग्रेस में इस पर सार्वजनिक चर्चा न्यूनतम है।

जंगी जहाज, फाइटर जेट तैनात

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिकी सेना इस हमले के लिए पूरी तरह से तैयार है। यूएस आर्मी जंगी जहाज, फाइटर जेट और रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट को तैनात कर चुकी है।

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस को बताया गया है कि मिलिट्री वीकेंड तक हमले के लिए तैयार है, लेकिन ट्रंप को अभी भी यकीन नहीं है कि यह सबसे अच्छा तरीका है। रिपोर्ट में सोर्स के हवाले से बताया गया है कि अमेरिकन कमांडर-इन-चीफ ने अकेले में मिलिट्री एक्शन के पक्ष और विपक्ष में बहस की है और सबसे अच्छे एक्शन के बारे में सलाहकारों और साथियों से राय ली है।

ट्रंप ने तेहरान को बार-बार धमकी दी है कि अगर चल रही बातचीत में उस न्यूक्लियर डील की जगह कोई और डील नहीं बनती जिसे अमेरिकी प्रेसिडेंट ने 2018 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान तोड़ दिया था, तो वे आगे मिलिट्री एक्शन लेंगे।

अमेरिकी मिलिट्री की हमले के लिए तैयार?

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, वाशिंगटन के पास अभी मिडिल ईस्ट में 13 वॉरशिप हैं। USS गेराल्ड आर. फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट कैरियर अभी अटलांटिक महासागर में कैरिबियन से मिडिल ईस्ट के रास्ते में है, जिसे इस महीने की शुरुआत में ट्रंप ने वहां जाने का आदेश दिया था। इसके साथ तीन डिस्ट्रॉयर हैं।

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