पुरुखों की प्राचीन परम्परा को याद करते हुए सत्तू का भोग लगे
पुरुखों की प्राचीन परम्परा को याद करते हुए सत्तू का भोग लगे श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क मात्र पचास साल पीछे भी झांक लीजिए तो गांव के सबसे सम्पन्न लोगों के यहां भी फसल की उपज तीन चार महीने में समाप्त हो जाती थी। अगहन(नवंबर) में धान की फसल कटती तो मार्च आते आते कोठिला से…
