श्रीराम कथा में पंगनूर गौ माता के दर्शन का पुण्यलाभ ले रहे श्रद्धालु
अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज ने बताया पुण्य अर्जित करने से जीवन हो जाएगा मंगलमय
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

बसहिं सुरभि जहाँ तीरथ सोई।
तजहिं प्रान मुक्ति सब कोई।।
रोम-रोम सुर तीरथ चरना।
केहि बिधि मातु करउँ मैं बरना।।
अर्थ: जहाँ सुरभि (गौ माता) निवास करती हैं, वही सच्चा तीर्थ है। जो गौ माता के सान्निध्य में अपने प्राण त्यागता है, उसे सीधे मुक्ति मिलती है। गाय के रोम-रोम में देवता और चरणों में तीर्थ हैं, ऐसे में मैं माता आपकी महिमा का वर्णन कैसे करूँ।
सीवान। पंगनूर गाय। विश्व की सबसे छोटी गाय। मात्र दो से ढाई फीट ऊंचाई। आंध्रप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की प्रतीक। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुभता की पहचान। इस गाय का दूध रोग प्रतिरोधक क्षमता से युक्त होने के साथ औषधीय विशेषताओं से भरपूर होता है। यह पंगनूर गाय हालांकि अब विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुकी है। बताया जाता है कि पूरी दुनिया में यह गाय तकरीबन एक हजार की संख्या में ही उपलब्ध है। यह गाय प्रधानमंत्री मोदी के दिल्ली स्थित निवास पर भी पाली जा रही है। उच्च दूध उत्पादन क्षमता, उच्च प्रजनन क्षमता, उच्च रोग प्रतिरोधक दूध उत्पादन की क्षमता से लैस यह गाय बेहद विशिष्ट है।
सीवान के वीएमएचई इंटर कॉलेज के प्रांगण में चल रही अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्य राजन जी महाराज द्वारा श्रीराम कथा वाचन के दौरान कथा पांडाल में उपस्थित इस पंगनूर गौ माता का दर्शन कर श्रद्धालु पुण्य लाभ ले रहे हैं। गुरुवार को श्रीराम कथा वाचन के दौरान राजन जी ने पंगनूर गौ माता के दर्शन के पुण्यलाभ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस गौ माता का दर्शन बेहद महिमामई है। मालूम हो कि यह गौ माता अभी हरनाथपुर के इस्कॉन मंदिर में रहती है।

पंगनूर गौ माता की विशेषताओं को देखते हुए डिवाइन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के प्रमुख सुभाष प्रसाद चौहान ने पंगनूर गाय को हैदराबाद से सीवान के जीरादेई प्रखंड के ग्राम जामापुर में अपने निवास स्थान पर मंगवाया फिर हरनाथपुर के इस्कॉन मंदिर में दिया।
सनातन परंपरा में गाय को माता का दर्जा प्राचीन काल से दिया जाता रहा है। पंगनूर गाय आंध्रप्रदेश में पाई जाने वाली एक विशेष प्रजाति की गाय है जिसका धार्मिक महत्व भी बहुत ज्यादा है। इस गाय को आंध्रप्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा भी माना जाता रहा है। पंगनूर गाय दो से ढाई फीट ही ऊंची होती है। इसका रंग सफेद, भूरा या लाल होता है। इसका शरीर मजबूत और अच्छी तरह से सुगठित होता है। असली पुंगनूर वैदिक काल में विशिष्ट और विश्वामित्र ऋषि के समय में पैदा होते थे।
जलवायु परिवर्तन होने और जगह बदलने के साथ इसकी ऊंचाई बढ़ती गई। पहले क़िज़्क़पुंगनूर की ऊंचाई ढाई से 3 फीट तक की होती थी, जिसे ब्रह्मा ब्रीड कहते हैं। श्रीराम कथा आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉक्टर राजन कल्याण सिंह, स्वागताध्यक्ष डॉक्टर शरद चौधरी, संयोजक डॉक्टर रूपेश कुमार, संरक्षक डॉक्टर रामेश्वर कुमार, डॉक्टर राम इकबाल गुप्ता ने बताया कि पंगनूर गौ माता की श्रीराम कथा पांडाल में उपस्थिति बेहद सुखद अनुभूति दे रही है।
