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शिवसेना छोड़ने वाले नेताओं को सांसद संजय राउत ने अपशब्द कहे!

शिवसेना छोड़ने वाले नेताओं को सांसद संजय राउत ने अपशब्द कहे!

कोई बेईमानी करेगा तो छोड़ेंगे नहीं-संजय राउत

श्रीनारद  मीडिया सेंट्रल डेस्क

उद्धव ठाकरे की शिवसेना नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं के बीच, मीडिया से बात करते हुए पार्टी सांसद संजय राउत ने बागी नेताओं के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया। राउत ने उन लोगों को अपशब्दों कहे जिन पर पार्टी छोड़ने का शक था। राउत ने यह पक्का करने के लिए कि यह जुबान फिसलने की वजह से नहीं, बल्कि जानबूझकर किया काम था। राउत ने मीडियाकर्मियों से कहा कि वे उनके अपशब्दों को सेंसर न करें। उन्होंने पत्रकारों से कहा कि इसे काटना मत, इसे चलाना।

राउत ने बागियों पर बेईमानी का लगाया आरोप

राउत ने बागियों पर बेईमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि ये बेईमान, गद्दार हैं और बेईमानी उनके खून में हैं, हमें ऐसा लगने लगा है। बाद में जब उनकी भाषा के बारे में पूछा गया तो राउत अपनी बात पर अड़े रहे और कहा कि उन्हें अपशब्दों का इस्तेमाल करने का कोई पछतावा नहीं है।

अपशब्दों के इस्तेमाल पर राउत को कोई पछतावा नहीं

उन्होंने कहा, “हम मराठी भाषा में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल करते हैं। इसमें गलत क्या है? मुझे अच्छी तरह से पता है कि कब और कौन सी भाषा इस्तेमाल करनी है। लोगों से उसी भाषा में बात करनी चाहिए जो वे समझते हैं। आप उस व्यक्ति के बारे में क्या कहेंगे जो 15 करोड़ रुपए लेकर पार्टी छोड़ देता है? क्या आप ऐसे व्यक्ति पर फूलों की पंखुड़ियां बरसाएंगे?”

पार्टी ने राउत का बचाव किया

राउत के गुस्से और अपशब्दों के इस्तेमाल के बाद पार्टी नेताओं को उनका बचाव करना पड़ा। उसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद सांसद अनिल देसाई ने कहा, “जो कुछ कहा गया, वे आम बोलचाल के शब्द है, इसका मकसद किसी खास व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं था। जब कोई बात भावनात्मक रुप से संवेदनशील व्यक्ति, जिसने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में 50 साल बिताए हों, बोलता है, तो ऐसी बातें हो जाती हैं। देसाई ने आगे कहा कि राउत किसी खास व्यक्ति को संबोधित नहीं कर रहे थे।

विरोधी दलों ने राउत पर साधा निशाना

हालांकि, विरोधी दलों ने राउत की टिप्पणियों को हाथों-हाथ लिया और उन पर हमला बोला। महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट ने कहा कि राउत की भाषा सही नहीं है। मुझे लगता है कि उन्हें (बागी सांसदों को) इस तरह अपशब्द कहना और उनका अपमान करना नहीं सही नहीं था। यह सब लंबे समय से चल रहा होगा। नतीजा यह है कि आज सांसद उनके साथ नहीं रहना चाहते।

संजय निरुपम ने राउत पर बोला हमला

शिवसेना नेता संजय निरुपम ने भी राउत पर हमला बोला और कहा कि यह भाषा उद्धव ठाकरे की पार्टी के पतन को दिखाती है। उन्होंने कहा कि संजय राउत बागी सांसदों को अपशब्द कह रहे हैं, यह उनकी पार्टी की लीडरशिप के फेल होने को दिखाता है। वे हिंदुत्व से दूर हो गए हैं, जिससे कार्यकर्ता, कैडर, विधायक और सांसद बहुत नाराज और बैचेन हैं। सभ्य समाज में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल मंजूर नहीं है।

संजय राउत का गुस्सा जायज है- इमरान प्रतापगढ़ी

हालांकि, सहयोगी पार्टी कांग्रेस ने राउत की भाषा को भावनाओं में बहकर कही गई बात बताया। पार्टी के राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि राउत का गुस्सा जायज है। उनकी पार्टी टूट गई और विधायकों को ले जाया गया। अब उन्हें फिर से निशाना बनाया जा रहा है। इसलिए संजय राउत का गुस्सा समझ में आता है।

शिवसेना (यूबीटी) में टूट की खबरों को लेकर पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि महाराष्ट्र में सांसदों की खरीद फरोख्त की गई। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिस किसी को जाना है वह इस्तीफा देकर जाए।

उन्होंने कहा, “कोई बेईमानी करेगा तो छोड़ेंगे नहीं। जिसको जाना है इस्तीफा दे और जाए। किसी ने साईबाबा की शपथ ली तो किसी ने मां की शपथ ली। जनता अब चुप नहीं बैठेगी। बागी सांसदों को छोड़ेंगे नहीं, शिवसेना हमारी मां है।”

‘सांसदों को खरीदा गया’

संजय राउत ने आगे कहा, ” ऑपरेशन टाइगर की चर्चा हो रही है। सांसदों को 15-15 करोड़ रुपए दिए गए हैं। कल 11 बजे संसदीय दल की बैठक है। अभी तक हम सभी साथ हैं और हम सबका अध्यक्ष एक है। बीजेपी शिवसेना को तोड़ने की कोशिश कर रही।” पीसी में अरविंद सावंत और अनिल देसाई भी मौजूद रहे।

‘जारी किया व्हिप’

संजय राउत का कहना है, “मेरे पास जानकारी है कि हर सांसद को 15-15 करोड़ रुपये दिए गए, जिसके बाद वे नांदेड़ और पुणे समेत तीन जगहों से चार्टर फ्लाइट में सवार हुए। हमने कल होने वाली संसदीय दल की बैठक के लिए व्हिप जारी किया है। अरविंद जी (अरविंद सावंत) ने लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा है।”

 

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