जलालपुर के एक गांव से निकले युवा जो छात्र जीवन से ही राजनीतिक का शहंशाह बना और आज नेताजी के नाम से है विख्यात
श्रीनारद मीडिया, मनोज तिवारी, छपरा (बिहार):

सारण जिले के जलालपुर के मंगोलपुर गांव के निवास जेपी सेनानी, समाजसेवी एवं शिक्षाविद पूर्व मुखिया ललन देव तिवारी जिन्होंने
जलालपुर ही नहीं सारण जिले में नेताजी के नाम से विख्यात हैं। इन्होंने शिक्षा, समाजसेवा और राजनीति के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि मेरे जीवन में कई क्षेत्रों में ऐतिहासिक कार्य करने का अवसर मिला जिसे बखूबी निर्वहन किया।
श्री तिवारी ने अपनी जीवनी के बारे मे बताया कि सबसे पहले पढ़ाई के समय जेपी आंदोलन से जुड़े हुए थे जेल भी गए। बताते चलें कि श्री तिवारी ने जय प्रकाश नारायण, पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर सिंह, लालू प्रसाद यादव,नीतीश कुमार सहित कई ऐतिहासिक लोगों के साथ कार्य करने का मौका मिला। उन्होंने बताया कि अपने जीवन में शिक्षक बनकर कई वर्षों तक पूरी निष्ठा के साथ कार्य किया।

फिर मुझे विष्णुपुरा पंचायत में मुखिया रहे थे। पूर्व शिक्षक, जेपी आंदोलन से जुड़े सेनानी, पूर्व मुखिया और जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता के रूप में सेवा दे रहे हैं।श्री तिवारी का सार्वजनिक जीवन संघर्ष, सेवा और जनसमर्पण की मिसाल माना जाता है। वे पेशे से शिक्षक रहे और शिक्षा के माध्यम से उन्होंने समाज को जागरूक करने का कार्य किया। युवाओं और बच्चों को बेहतर शिक्षा, अनुशासन और संस्कार का संदेश देना उनकी पहचान रही है।
राजनीति में उनकी सक्रियता की शुरुआत महज 18 वर्ष की आयु में हो गई थी। युवावस्था से ही उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रेरित होकर उन्होंने जनहित के मुद्दों को हमेशा प्राथमिकता दी। इसी कारण उन्हें क्षेत्र में एक जेपी सेनानी के रूप में भी सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।
विशुनपुरा पंचायत की राजनीति में उनका प्रभाव वर्षों से कायम है। वे कई बार मुखिया का चुनाव लड़ चुके हैं और जनता के आशीर्वाद से मुखिया पद की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं। एक बार फिर उनके चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाएं तेज हैं और समर्थकों के बीच उनकी उम्मीदवारी को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि ललन देव तिवारी की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी, सहजता और लोगों के सुख-दुख में हमेशा खड़े रहने की प्रवृत्ति है। चाहे सामाजिक कार्यक्रम हो, धार्मिक आयोजन हो या किसी परिवार की व्यक्तिगत परेशानी, उनकी उपस्थिति लोगों को भरोसा देती है।
युवाओं को प्रेरित करना और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ समाज निर्माण के लिए तैयार करना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है। वे बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हैं और नई पीढ़ी को नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ने की सीख देते हैं।
क्षेत्र में उनकी प्रशासनिक समझ और विभिन्न स्तरों पर संवाद क्षमता की भी चर्चा होती है। ग्रामीणों का मानना है कि शासन-प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने और जनसमस्याओं के समाधान के लिए वे हमेशा सक्रिय रहते हैं।
शिक्षक से समाजसेवी, समाजसेवी से जनप्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि से
जननेता तक का सफर तय करने वाले श्री ललन देव तिवारी आज भी लोगों के बीच उतने ही लोकप्रिय हैं। उनकी कार्यशैली, सरल स्वभाव और जनसेवा की भावना उन्हें क्षेत्र की एक सम्मानित और प्रेरणादायक शख्सियत बनाती है।
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