भाजपा की रणनीति ने तोड़ा ‘दीदी’ का अभेद्य किला
साइलेंट वार से उड़ा दी ममता बनर्जी की नींद
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

भाजपा की बंगाल पर जीत ऐतिहासिक है। इसके रणनीतिकार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रहे हैं। बंगाल चुनाव से पहले शाह 15 दिन बंगाल में डटे रहे। वे दिन में रैली – रोड शो करते। रात में हर सीट की समीक्षा कर माइक्रो मैनेजमेंट देखते थे।
जीत पर शाह ने कहा, बंगाल ने घुसपैठियों और उनके हितैषियों को सबक सिखाया है। तुष्टीकरण की राजनीति वाले दल इसे भूल नहीं पाएंगे। भाजपा ‘सोनार बांग्ला’ बनाएगी। शाह के साथ 5 और नेता हर मोर्चे पर डटे थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने बनाया संतुलन
शिक्षा मंत्री प्रधान ने विभिन्न सामाजिक और जातीय समूहों में संतुलन बनाए रखा। वे केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच कड़ी बने रहे।
भूपेंद्र यादव का माइक्रो मैनेजमेंट
पर्यावरण मंत्री यादव ने संगठन का माइक्रो मैनेजमेंट देखा। वर्कर्स को बूथ स्तर तक एक्टिव किया । कानूनी जटिलताएं संभाली। जमीनी स्तर पर पार्टी की ताकत काफी बढ़ाई।
सुनील बंसल की TMC कैडर को चुनौती
भाजपा महासचिव ने पन्ना प्रमुख मॉडल के जरिए कार्यकर्ताओं का नेटवर्क खड़ा कर टीएमसी के मजबूत कैडर को चुनौती दी। आंतरिक मतभेद दूर करने में अहम भूमिका निभाई। चार वर्षों से हर विधानसभा क्षेत्र से मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी ने कमजोरियां दूर की। ममता सरकार के खिलाफ जमीनी मुद्दों पर सड़क पर भी उतरे।
बिप्लब देब का आक्रामक प्रचार
त्रिपुरा के पूर्व सीएम ने उन क्षेत्रों पर फोकस किया, जो सांस्कृतिक रूप से उनके गृह राज्य से मिलते हैं। आक्रामक प्रचार से पार्टी कैडर में ऊर्जा भरी।
अमित मालवीय की आईटी सेल
भाजपा आईटी सेल प्रमुख ने नैरेटिव की लड़ाई का नेतृत्व किया। सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हुए विभिन्न मुद्दों को बड़े पैमाने पर उभारा और विपक्ष की प्रचार मशीनरी का प्रभावी जवाब दिया।
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