दलपीठी का लोक और उसकी रसोई
दलपीठी का लोक और उसकी रसोई श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क गँवई साँझ कुछ और ही रंग में रंगी होती है। धूप ढलकर जब चौखटों से उतरती है। आँगन में धुएँ की हलकी लकीरें उठती हैं। उसी में घुला रहता है किसी पकवान की महक। कभी लहसुन के छौंक की, कभी पंचफोरना की, कभी सोंधी दाल…
