परिसीमन को 25 वर्षों के लिए स्थगित करने की मांग-सीएम स्टालिन
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके. स्टालिन ने परिसीमन को 25 वर्षों के लिए स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने शनिवार को कहा कि सभी विपक्षी दलों के सांसदों के प्रयासों से परिसीमन विधेयक को पारित होने से रोकने में सफलता मिल पाई है।
स्टालिन ने वीडियो क्लिप में कहा, परिसीमन विधेयक के विरुद्ध हमारा संघर्ष सफल रहा। एक वर्ष से भी अधिक समय पहले हमने इस खतरे को भांप लिया था और उसी क्षण से हमने इस विजय के लिए आवश्यक कार्य शुरू कर दिए थे।
निर्वाचन क्षेत्र परिसीमन की आड़ में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए लाया गया विधेयक संसद में गिर गया। भाजपा ने महिला आरक्षण की आड़ में इस विधेयक को लाने की कोशिश की, लेकिन 12 वर्षों में पहली बार प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को संवैधानिक संशोधन विधेयक पारित नहीं करवा सकी।
स्टालिन ने कहा, यह विपक्षी दलों की एकता की शुरुआत है। अगर हम एकजुट रहेंगे तो हमारी जीत निश्चित है। हमने जो हासिल किया है वह केवल आधी जीत है। सीटों की संख्या का परिसीमन संवैधानिक रूप से अगले 25 वर्षों के लिए यानी 2051 तक निलंबित किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार सुबह प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया और उसकी एक कॉपी भी जलाई। स्टालिन ने राज्य भर में परिसीमन विरोधी आंदोलन शुरू करने के लिए काला झंडा भी फहराया।
एक्स पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “परिसीमन को लेकर तमिलनाडु भर में विरोध की भावना फैल जाए। फासीवादी भाजपा का अहंकार चूर-चूर हो जाए। उस समय, तमिलनाडु में हिंदी के विरोध में जो आग भड़की थी, उसने दिल्ली को भी झुलसा दिया था। हमारी वह आग तभी शांत हुई, जब दिल्ली ने हार मान ली।”
‘बिल की कॉपी जलाकर विरोध की एक और आग जलाई’
उन्होंने आगे लिखा, “आज मैंने उस ‘काले कानून’ की एक प्रति जलाकर विरोध की एक और आग जलाई है, जो तमिल लोगों को उनकी अपनी ही धरती पर शरणार्थी बना देता है। यह आग भी पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैल जाएगी। यह भाजपा के अहंकार को झुकाकर ही दम लेगी।”
विरोध में पहने काले कपड़े
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ के विरोध में काले रंग के कपड़े पहने। इस विधेयक में परिसीमन का प्रस्ताव किया गया है, जिसका उद्देश्य राज्यों की विधानसभाओं और लोकसभा के आकार तथा संरचना में परिवर्तन करना है।
प्रस्तावित परिसीमन बिल के विरोध में तिरुचिरापल्ली के थेन्नूर में तमिलनाडु के मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी के घर पर भी काले झंडे लगाए गए हैं। यह तब हुआ जब स्टालिन ने पूरे राज्य में काले झंडे दिखाने का आह्वान किया और लोगों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन बिल के खिलाफ तमिलनाडु के अधिकारों के लिए इस संघर्ष को एक ‘सामूहिक संघर्ष’ बताया।
विपक्ष जता रहा आपत्ति
प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है और केंद्र द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को लागू करने के लिए मसौदा संशोधन विधेयकों को हाल ही में मंजूरी दिए जाने के बाद यह विरोध और भी तेज हो गया है। विपक्ष ने चुनाव के मौसम के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने में की गई जल्दबाजी पर भी आपत्ति जताई है।
किस हिसाब से किया जाएगा परिसीमन
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया में राज्यों के बीच लोकसभा सीटों के बंटवारे का आधार सिर्फ 2011 की जनगणना नहीं होगी। इसके बजाय परिसीमन एक ऐसे फॉर्मूले के आधार पर किया जाएगा, जिसमें सभी राज्यों की हिस्सेदारी को आनुपातिक रूप से और 50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।
रिपोर्ट में बताया गया, “सिर्फ इतना ही नहीं सभी राज्यों को फायदा होगा। उन्हें 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद मिलने वाले प्रतिनिधित्व से भी ज्यादा प्रतिनिधित्व मिलेगा।”
उदाहरण के तौर पर अगर तमिलनाडु राज्य को ही ले लें तो प्रस्तावित योजना के तहत इसकी मौजूदा सीटें 39 से बढ़कर 59 हो जाएंगी। अगर 2011 की जनगणना के आधार पर इसकी सीटों का बंटवारा किया जाता तो ये 49 होतीं।
किस राज्य में कितनी बढ़ जाएंगी सीटें

अगर इसे 2011 की आबादी को आधार बनाकर किया जाता है तो दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व हिंदी बेल्ट के मुकाबले लगभग 4% कम हो सकता है। अधिकतम 850 सीटों का प्रावधान किया गया है, ठीक वैसे ही जैसे अभी 550 सीटों की ऊपरी सीमा है, जबकि सदन की असल संख्या 543 है। बता दें कि ये सिर्फ अनुमान है।
परिसीमन के प्रावधानों के खिलाफ वोट करेगा विपक्ष
विपक्षी पार्टियों ने कहा कि वे परिसीमन पर संवैधानिक संशोधन के खिलाफ वोट करेंगी। उन्होंने इसे एक खतरनाक कदम बताया, जिससे दक्षिण, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और अन्य छोटे राज्यों का हिस्सा कम हो जाएगा।
वहीं राहुल गांधी ने इसे एक “राष्ट्र-विरोधी कृत्य” करार दिया। उन्होंने मांग की कि मोदी सरकार 2023 में सर्वसम्मति से पारित अनुच्छेद 334(a) का पालन करते हुए लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या के आधार पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण को तत्काल लागू करे।
