भारतरत्न डा भीमराव पर परिचर्चा आयोजित
श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार):

महापुरुष किसी जाति एवं समुदाय विशेष के नहीं होते. डा कृष्ण
सामाजिक समरसता के मिशाल थे बाबा साहब. डा ललीतेश्वर
भारत को समझने के लिए डा भीमराव अम्बेडकर को समझना होगा. लोकपाल ।
भीम दर्शन को आत्मसात करना समय की मांग है. कुमकुम
समावेशी समाज के शिल्पकार है डा अम्बेडकर. शिवम
जीरादेई. गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डा राजेंद्र प्रसाद के पैतृक जीरादेई के विजयीपुर गांव मेँ मंगलवार को ” पर्वत्तक़ विहार ” भवन मेँ भारत रत्न डा भीमराव अम्बेडकर के जीवन दर्शन पर परिचर्चा आयोजित की गयी. जिसमें सभी समुदाय के लोगों ने भाग लिया तथा बाबा साहब के आदर्शो पर चलने का संकल्प लिया. जनसुराज पार्टी के बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सह सिवान तीतीर स्तूप बौद्ध विकास मिशन के संस्थापक डा कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि महापुरुष किसी जाति एवं समुदाय के नहीं होते वे सभी जन के आदर्श होते है उनको किसी विशेष सीमा मेँ नहीं बंधा जा सकता है इसी का जवळन्त उदाहरण है।
भारतरत्न सह संविधान के शिल्पकार डा भीमराव अम्बेडकर. उन्होंने बताया कि विश्व के विद्वानों की सूची मेँ अग्रणी स्थानप्राप्त डा अम्बेडकर विश्व के लोकनायक भगवान बुद्ध के परम् अनुयायी थे तथा आजीवन भारत की दशा एवं दिशा बदलने मेँ अपनी ऊर्जा को लगाते रहे तथा अपनी गुरु के प्रति समर्पण का अनूठा मिशाल पेश किये इसका बेहतर उदाहरण है ।
अपने आप को ब्रह्मणगुरु अम्बेडकर के नाम को अपने नाम मेँ समाहित करना ।राष्ट्र सृजन अभियान के राष्ट्रीय महासचिव डा ललीतेश्वर कुमार ने कहा कि बाबा साहब समाजिक समरसता के मिशाल थे तथा सबको आपस मेँ जोड़ने का काम किये तथा सबके अधिकार का संरक्षण करने के लिए विश्व का सबसे बड़ा संविधान निर्माण मेँ महती भूमिका अदा किये ।
लोकपाल प्रशांत कुमार ने कहा कि भारत को समझने के लिए बाबा साहब को समझना होगा।उन्होंने बताया कि अगर ईमानदारी पूर्वक बाबा साहब के योगदान का समीक्षा किया जाय तो समाज मेँ किसी प्रकार का विभेद नहीं रहेगा तथा शांति एवं अमन का भारत होगा। अवकाश प्राप्त बीडीओ कुमकुम श्रीवास्तव ने कहा कि बाबा साहब आज भी प्रासंगिक है तथा उनके जीवन दर्शन को आत्मसात समय की मांग है.उन्होंने बताया कि बाबा साहब के पुस्तकों को पढना भावी पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है।
उन्होंने बताया कि इनका महानता इसी बात से सिद्ध होती है कि इनके द्वारा रचित पुस्तक विदेशों के विश्वविद्यालयों मेँ पढ़ाया जाता है । मर्चेंट नेवी के चीफ ऑफिसर शिवम कुमार राजा ने कहा कि
समावेशी समाज के शिल्पकार है डा भीमराव अम्बेडकर जो आभाव को अवसर के रूप मेँ परिभाषित कर विश्व का अनूठा उदाहरण पेश किया तथा साबित किया कि आभाव मंजिल को पाने मेँ रूकावतट नहीं है जरूरत है अपनी ऊर्जा को सकारत्मक कार्यों मेँ लगाना । सीए सुमन कुमार ने कहा कि बाबा साहब ने साबित किया कि शिक्षा से ही सामाजिक परिवर्तन संभव है ।
इस मौके पर जनसुराज के किसान अध्यक्ष रामेश्वर सिंह, जीरादेई प्रखंड उपप्रमुख अनिल सिंह,पूर्व सरपंच रमाश्रय सिंह, राजद नेता हरेंद्र सिंह ,शिक्षक नेता मनन सिंह, केदार सिंह,मनोरंजन सिंह, अर्चना सिन्हा ,आरती सिंह , प्रिय सिंह , विकास सिंह , रविन्द्र सिंह हरिकांत सिंह, सिवान तितिर स्तूप विकास मिशन के अध्यक्ष माधव शर्मा ,गुलशन कुमार
,हरिशंकर चौहान , डा संजय गिरी ,परम् हंस राय,दिलीप सिंह, दीपक राम,बजरंगी सिंह,राज न तिवारी आदित्य पांडेय, अर्जुन सिंह,अंगद खरवार, घनश्याम सिन्हा, अंकित मिश्रा ,राजन तिवारी ,ओमप्रकाश कुशवाहा ,अभिषेक मिश्रा ,चन्दन कुमार, लाल बाबू तिवारी,अभय कुमार, सीता राम हरिजन ,श्रीकांत राम ,सखीचंद साह,अरबाज अंसारी, शहाबुद्दीन अंसारी,छोटू चौरसिया, सुरेश पासवान आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे.
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