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185 वर्ष पुरानी पांडुलिपि साझा करने के लिए डीएम सिवान ने किया सम्मानित

185 वर्ष पुरानी पांडुलिपि साझा करने के लिए डीएम सिवान ने किया सम्मानित
*ज्ञान भारतम् अभियान में सहयोग के लिए प्रबुद्धजन आने लगे आगे*
श्रीनारद मीडिया, सीवान (बिहार):
सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए भारत सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान में सोमवार को जिले में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई। भगवानपुर हाट प्रखंड के पिपरहिया गांव के निवासी डॉक्टर विधुशेखर पांडेय को 185 वर्ष प्राचीन तुलसी कृत श्री राम चरित मानस से संबंधित पांडुलिपि को सुरक्षित रखने और जिला प्रशासन से साझा करने के लिए जिला पदाधिकारी सिवान विवेक रंजन मैत्रेय ने सम्मानित किया। इस अवसर पर सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा, डीडीसी मुकेश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी बालेंदु नारायण पांडेय, जिला परिवहन पदाधिकारी अमर ज्योति भी उपस्थित रहे।
185 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि तुलसी कृत श्री रामचरित मानस से संबंधित है जिसे स्वर्गीय पंडित रघुवर पांडेय ने लिखा था, जो अपने समय में प्रख्यात ज्योतिर्विद और तंत्र विज्ञानी थे, जो मांझा गढ़ राज के राजपुरोहित भी थे। उनके परिवार ने 1840 में रचित उनकी कृति को 185 वर्ष से सुरक्षित रखा है। यह पांडुलिपि तत्कालीन समय की बौद्धिक चेतना को भी प्रकट कर रही हैं। मालूम हो कि पूर्व में जिला पदाधिकारी द्वारा घर में मौजूद 75 वर्ष से अधिक की पुरानी पांडुलिपियों को जिला प्रशासन से साझा करने का अनुरोध बार बार किया गया था ।
पांडुलिपि खोज अभियान के क्रम में डॉक्टर विधु शेखर पाण्डेय, अमिताभ पांडेय, डॉक्टर रामशरण पांडेय ने अपने घर पर मौजूद 185 वर्ष प्राचीन हस्तलिखित पांडुलिपि को देखने के लिए ज्ञान भारतम् टीम के सदस्यों गणेश दत्त पाठक और आशुतोष नंदन को जानकारी दी। वहां अपने पूर्वज द्वारा लिखित हस्तलिखित पांडुलिपि को दिखाया, जिसको संरक्षित करने में स्वर्गीय चंद्र दीप पांडेय की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसकी सूचना जिला पदाधिकारी, सिवान को दी गई। अपने कार्यालय में जिला पदाधिकारी और अन्य वरीय पदाधिकारीगण ने हस्त लिखित पांडुलिपि का अवलोकन किया।
इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने पांडुलिपि को सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर विधु शेखर पाण्डेय और उनके परिवार के प्रति आभार जताया और कहा कि उन्होंने पांडुलिपि जैसे सांस्कृतिक विरासत को सहेज कर रखा। उन्होंने फिर अपील किया कि लोग अपने घरों में मौजूद पांडुलिपियों को जिला प्रशासन से साझा करें। इससे सिवान के सांस्कृतिक इतिहास के अद्यतन शोध में मदद मिलेगी। हम पांडुलिपियों को केवल डिजिटली सुरक्षित कर जिसकी पांडुलिपि है उसे लौटा दे रहे हैं।

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