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विशेष स्क्रीनिंग अभियान: अब स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी बीपी, शुगर, कैंसर, एनीमिया और सिफलिस समेत कई बीमारियों की मुफ्त जांच

विशेष स्क्रीनिंग अभियान: अब स्वास्थ्य केंद्रों पर होगी बीपी, शुगर, कैंसर, एनीमिया और सिफलिस समेत कई बीमारियों की मुफ्त जांच
– घर-घर से लोगों को लाकर होगी गंभीर बीमारियों की स्क्रीनिंग
– सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर चलेगा विशेष अभियान, हर दिन होगी मॉनिटरिंग
– आशा, एएनएम, सीएचओ से लेकर जिला कार्यक्रम प्रबंधक तक की तय हुई जिम्मेदारी

श्रीनारद मीडिया, पंकज मिश्रा, अमनौर/छपरा(बिहार):

 

स्वास्थ्य विभाग ने गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के लिए राज्यव्यापी विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत राज्य के सभी आयुष्मान आरोग्य मंदिर, स्वास्थ्य उपकेंद्र, अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र , रेफरल अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और जिला अस्पताल में लोगों की व्यापक स्वास्थ्य जांच की जाएगी। अभियान के दौरान उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (शुगर), सीओपीडी, विभिन्न प्रकार के कैंसर, एनीमिया और सिफलिस जैसी गंभीर बीमारियों की निःशुल्क स्क्रीनिंग की जाएगी।
राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने सभी जिलों को निर्देश जारी करते हुए अभियान की विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र राज्य स्वास्थ्य समिति को उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही आवश्यक दवाओं, जांच किट, उपकरण और अन्य चिकित्सीय सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

ओपीडी में आने वाले हर मरीज की होगी स्क्रीनिंग
केवल विशेष शिविरों में आने वाले लोगों की ही नहीं, बल्कि जिला अस्पतालों, अनुमंडल अस्पतालों, रेफरल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की ओपीडी में इलाज कराने आने वाले प्रत्येक मरीज की भी स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके अलावा आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से रेफर किए गए संभावित मरीजों की Essential Diagnostic List के अनुसार आवश्यक जांच कर समुचित उपचार सुनिश्चित किया जाएगा। सभी मरीजों को आवश्यक दवाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।
दवाओं और जांच किट की पहले से होगी व्यवस्था
अभियान के सफल संचालन के लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों में आवश्यक दवाएं, रैपिड डायग्नोस्टिक किट (RDK), रिएजेंट, कंज्यूमेबल्स और अन्य उपकरण पहले से उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर जिलों को बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (BMSICL) से अतिरिक्त सामग्री की मांग करने की भी अनुमति दी गई है।

घर-घर जाकर लोगों को जांच के लिए प्रेरित करेंगी आशा कार्यकर्ता
इस अभियान में आशा कार्यकर्ताओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आशा कार्यकर्ता एएनएम के साथ घर-घर जाकर लोगों को स्क्रीनिंग के लिए प्रेरित करेंगी और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक लाएंगी। पहले से उच्च रक्तचाप और मधुमेह से पीड़ित मरीजों को फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा। उन्हें आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी तथा उनकी पूरी जानकारी NP-NCD Portal पर दर्ज की जाएगी।

सीएचओ और एएनएम पर लक्ष्य पूरा करने की जिम्मेदारी
आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (CHO) वहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की स्क्रीनिंग करेंगे। सीएचओ, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को अपने-अपने क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य का 100 प्रतिशत हासिल करने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सा पदाधिकारी एएनएम के सहयोग से स्क्रीनिंग अभियान का संचालन करेंगे।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी करेंगे रोजाना निगरानी
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC), प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक (BHM) और प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक (BCM) को अभियान की प्रतिदिन निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।इन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्वास्थ्य कर्मी समय पर उपस्थित रहें। आशा कार्यकर्ता क्षेत्र में सक्रिय रहें। सभी दवाएं, जांच किट और उपकरण पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हों। अभियान के निर्धारित लक्ष्य की शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित हो।
जिला स्तर पर भी तय हुई जिम्मेदारी

स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तर के अधिकारियों की भी स्पष्ट जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। जिला सामुदायिक उत्प्रेरक (DCM) आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को स्क्रीनिंग के लिए स्वास्थ्य संस्थानों तक लाने का कार्य करेंगे। जिला योजना समन्वयक (DPC) यह सुनिश्चित करेंगे कि अभियान के दौरान सभी स्वास्थ्य कर्मी निर्धारित ड्रेस कोड में उपस्थित रहें तथा सभी गतिविधियों की नियमित निगरानी हो। जिला अनुश्रवण एवं मूल्यांकन पदाधिकारी (DM&EO) प्रतिदिन प्राप्त आंकड़ों को NP-NCD Portal पर दर्ज कर राज्य एनपी-एनसीडी कोषांग को ई-मेल के माध्यम से रिपोर्ट भेजेंगे।

उपकरण और दवाओं की उपलब्धता पर रहेगा विशेष जोर
जिला गैर-संचारी रोग पदाधिकारी तथा वित्त-सह-लॉजिस्टिक सलाहकार को संयुक्त रूप से यह जिम्मेदारी दी गई है कि अभियान के दौरान किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में दवाओं, जांच किट, उपकरण, रिएजेंट या कंज्यूमेबल्स की कमी न हो।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक होंगे नोडल पदाधिकारी
पूरे अभियान के जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारी जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) होंगे। वे अभियान की सूक्ष्म कार्ययोजना तैयार करने, मानव संसाधन उपलब्ध कराने, दैनिक उपलब्धियों की समीक्षा करने, आवश्यक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा सभी आंकड़ों को पोर्टल पर अपलोड कराने की जिम्मेदारी निभाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक कार्य दिवस की दैनिक प्रगति रिपोर्ट अपराह्न 4 बजे तक राज्य एनपी-एनसीडी कोषांग को भेजना भी उनकी जिम्मेदारी होगी।

समय रहते बीमारी की पहचान होगा सबसे बड़ा लक्ष्य
डीपीएम अरविन्द कुमार ने कहा कि इस विशेष अभियान के माध्यम से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, एनीमिया, सिफलिस और अन्य गैर-संचारी रोगों की समय रहते पहचान हो सकेगी। इससे मरीजों को प्रारंभिक अवस्था में ही उपचार उपलब्ध होगा और गंभीर जटिलताओं तथा मृत्यु दर में कमी लाने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि अधिक से अधिक लोग स्क्रीनिंग कराकर स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

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