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ममता बनर्जी को बड़ा झटका, TMC सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, TMC सांसद सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दिया, राज्यसभा सदस्य पद छोड़ा

श्रीनारद मीडिया, सेंट्रल डेस्‍क:

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सकंट का सामना कर रही तृणमूल कांग्रेस को सोमवार को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और साथ ही संसद के उच्च सदन की सदस्यता भी छोड़ दी.तृणमूल के वरिष्ठ नेता एवं संसद में पार्टी की सबसे मुखर आवाजों में से एक रहे राय ने राज्यसभा के सभापति को अपना इस्तीफा सौंपा और साथ ही ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी छोड़ने का ऐलान किया.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल अंदरूनी खींचतान से गुजर रही है. पार्टी के विधायी दल में विद्रोह और विभिन्न गुटों के बीच बढ़ते तनाव ने संगठन को हिलाकर रख दिया है.

आरजी कर घटना पर बोले सुखेंदु शेखर रॉय
तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने आरजी कर रेप की घटना पर कहा कि, पावर टीएमसी पर इस हद तक चढ़ गई थी कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई भी उन्हें छू नहीं सकता. उन्होंने कहा, बंगाल के इतिहास में पहली बार, पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार सत्ता में आई है… वोटर टर्नआउट ने 97 या 98 प्रतिशत का ऑल-टाइम रिकॉर्ड बनाया… पार्टी ने इस बारे में कोई विश्लेषण नहीं किया.

उन्होंने कहा, जो लोग पिछले पंद्रह सालों से सत्ता में थे, मंत्री, पंचायत नेता, पार्षद, मेयर, वगैरह, उन तक पहुंचना मुश्किल हो गया. उनसे संपर्क करना भी मुश्किल था. वे जमीनी हकीकत से दूर हो गए थे. सुखेंदु ने कहा, “हमारे पार्टी कार्यकर्ता जिन्होंने अपने खून-पसीने से संगठन को मजबूत किया, जिन्होंने सालों तक लेफ्ट फ्रंट के खिलाफ लड़ाई लड़ी, उन्हें किनारे कर दिया गया. उनकी जगह बिचौलिए, चोर, डकैत और बलात्कारी सामने आ गए.

टीएमसी से इस्तीफा देने बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने कहा कि, यह सब अब सामने आ रहा है और टीवी पर दिखाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि, हमारे देश में रेप और मर्डर की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं. समाज में इससे ज्यादा घिनौना कुछ नहीं है. उन्होंने कहा कि, आरजी कर वाली घटना का असर सिर्फ वहीं तक सीमित नहीं था… जैसे ही RG कार वाली घटना हुई, जनता सड़कों पर उतर आई.

सुखेंदु ने कहा कि, जो लोग अपनी जिंदगी में कभी किसी जुलूस या सार्वजनिक बैठक में शामिल नहीं हुए थे, और जिनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था, वे भी, डॉक्टर भी, पूरी रात सड़कों पर रहे… उस समय, नेताओं और व्यवस्थापकों ने इस बारे में कोई सोच-विचार या चर्चा नहीं की.

उन्होंने कहा कि, टीएमसी को पावर का नशा सिर पर इस हद तक चढ़ गई थी कि उन्हें लगता था कि दुनिया में कोई उन्हें छू नहीं सकता. लेकिन जिन लोगों ने उन्हें वहां भेजा था, उन्हीं ने अब उन्हें नीचे गिरा दिया है. उन्होंने टीएमसी के नेताओं की संपत्ति की जांच करने की मांग की.

पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने शुक्रवार को संकेत दिया कि हाल में विधायकों के विद्रोह का असर पार्टी के सांसदों पर भी पड़ सकता है. अपने इस्तीफे में राय ने कहा कि वे अपनी संसद सदस्यता छोड़ रहे हैं और तृणमूल से अपना नाता तोड़ रहे हैं.

रॉय का इस्तीफा ऐसे समय में आया है, जब कुछ दिन पहले ही तृणमूल कांग्रेस विधायकों के एक बड़े समूह ने विधानसभा में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए विधायक दल पर प्रभावी नियंत्रण हासिल कर लिया था. इसे तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से उसका सबसे बड़ा संगठनात्मक संकट माना जा रहा है.

इससे पहले एक टीवी चैनल से बातचीत में रॉय ने कहा था कि विधानसभा में जिस तेजी से और बड़े पैमाने पर असंतोष सामने आया, वह अभूतपूर्व है और आने वाले महीनों में इसका असर लोकसभा में भी दिख सकता है.

 

उन्होंने कहा था, “मैंने कभी नहीं देखा कि इतनी बड़ी संख्या में विधायक इतनी कम अवधि में अलग रुख अपनाएं, जो हो रहा है, उसका असर लोकसभा में भी दिख सकता है.” रॉय ने यह भी दावा किया था कि पार्टी में चल रहा घटनाक्रम करीब दो साल पहले की उनकी चेतावनी के अनुरूप है. उन्होंने कहा कि 2024 में आरजी कर अस्पताल मामले के दौरान उन्होंने पहले ही संगठनात्मक टूट की आशंका जताई थी.

उन्होंने कहा था, “जो कुछ हो रहा है, वह मुझे आश्चर्यचकित नहीं करता। मैंने पहले ही कहा था कि संगठन अंततः टूट जाएगा. यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.” पार्टी नेतृत्व पर अब तक का सबसे तीखा हमला करते हुए रॉय ने कहा था कि वह औपचारिक रूप से भले ही तृणमूल कांग्रेस में हैं, लेकिन मानसिक रूप से नहीं.

पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के कई नेताओं ने या तो सार्वजनिक रूप से पार्टी की दिशा पर सवाल उठाए हैं या सोशल मीडिया पर ऐसे संकेत दिए हैं जिन्हें नेतृत्व की आलोचना माना जा रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि यदि असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा, तो तृणमूल कांग्रेस को आने वाले समय में और बड़े संगठनात्मक संकट का सामना करना पड़ सकता है.

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