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क्या असम में हिमंत के खिलाफ माहौल बनाने से चूक गई कांग्रेस?

क्या असम में हिमंत के खिलाफ माहौल बनाने से चूक गई कांग्रेस?

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

असम विधानसभा के लिए चुनाव प्रचार मंगलवार को खत्म हो गया। गुरूवार को होने वाले मतदान के पहले चले चुनाव प्रचार में हर स्तर पर भाजपा के चेहरे व मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के कांग्रेस नेताओं पर भारी दिखे।कम से कम आत्मविश्वास के मापदंड पर। वहीं कांग्रेस स्पष्ट चुनावी मुद्दों के अभाव से लेकर संगठन में सुस्ती, आपसी भरोसे के अभाव के कारण तुलनात्मक रूप से शिथिल दिखी।

अलग अलग चुनावी मंचो से जिस तरह हिमंता ने धुन पर थिरकते लोगों को जोड़ा और चुनाव को उत्सव का रूप दे दिया , उसके आगे कांग्रेस नेता माहौल बनाने में चूक गए।

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क्या हिमंत के सामने फीकी पद गई कांग्रेस?

इसके साथ ही भाजपा के 31 वायदों वाले संकल्प पत्र की तुलना में कांग्रेस की पांच गारंटी भी थोड़ी हल्की दिखी। चुनाव प्रचार में भाजपा की इस बढ़त का असर चुनाव परिणामों में भी दिख सकता है।वैसे तो भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा राजनाथ सिंह समेत बड़े नेताओं ने कई जनसभाओं को संबोधित और रोडशो किया।

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राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, मल्लिकार्जन खरगे और गौरव गोगोई की तुलना में भाजपा नेताओं की सभाओं में जुटी भारी भीड़ उसकी विस्तृत तैयारियों और स्थानीय स्तर संगठन की मजबूती स्थिति को दिखाता है।

चुनावी रैलियों में भी भाजपा नेताओं के खिलाफ घुसपैठ के खिलाफ आक्रामक बयानों और असमिया अस्मिता की सुरक्षा को लेकर तीखे तेवरों की तुलना में कांग्रेस नेता हिमंत बिस्व सरमा के खिलाफ ज्यादा केंद्रित रहे।

राहुल गांधी भी अपने भाषण में सरमा को जेल भेजने पर ज्यादा जोर देते रहे। जबकि 23 मुस्लिम बहुल सीटों और उनमें बांग्लादेशी भाषियों की बड़ी संख्या को देखते हुए कांग्रेस नेताओं में अवैध घुसपैठ को लेकर आक्रमता नहीं दिखी।

ले-देकर वे मोदी सरकार के दौरन तीन हजार की तुलना में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान 80 हजार से अधिक अवैध घुसपैठियों को वापस बांग्लादेश में भेजने की बात करते रहे। जबकि अवैध घुसपैठ और उससे असमिया अस्मिता को खतरा आजादी के बाद से ही असम में अहम मुद्दा रहा है और 1985 में राजीव गांधी के प्रधानमंत्री कार्यकाल में हुए असम समझौते में अवैध घुसपैठियों को बाहर करने का स्पष्ट प्रविधान है।

लेकिन चुनाव प्रचार के केंद्र में रहे खुद मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा। हर दिन सुबह सात बजे से आधी रात चार-पांच रैलियों, रोडशो के दौरान उनकी ऊर्जा, स्थानीय मुद्दों की समझ और जनता का साथ जुड़ाव साफ-साफ दिखा।

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चुनाव प्रचार में बीजेपी काफी आगे

पांच-पांच रैलियों के बाद भी रोडशो के दौरान हिमंत का गाने की धुन पर नाचते हुए वीडियो उनकी ऊर्जा और बिना थके लगातार काम करने की क्षमता को दिखता है।

लेकिन महिलाओं के साथ हिमंत का यह जुड़ाव नया नहीं है। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनके रोडशो में इसी तरह महिलाओं की भारी भीड़ उन्हें एक बार छूने को बेताब दिखती थी।

पिछले पांच सालों में महिला केंद्रित जन कल्याणकारी योजना के सहारे उन्होंने इस जुड़ाव को मजबूत किया है। 40 लाख महिलाओं को ओरोनुदेई (अरुणोदय) स्कीन के तहत 1250 रुपये की सहायता तो हर महीने जा रही थी। पिछले महीने हर परिवार के नौ हजार रुपये अलग से दिये गए।

इसके अलावा महिला उद्मिता के तहत 30 लाख महिलाओं को 10-10 रुपये दिए और बाद में एक-एक लाख रुपये देने का वायदा भी किया गया (बिहार की तरह)। इसके साथ कालेज जाने वाले लड़कियों को निजुट स्कीम के तहत एक-एक हजार रूपये हर महीने की सहायता दी जाती है।

अभी यह 5.5 लाख लड़कियों को मिल रहा है और इसे 10 लाख लड़कियों को देने का लक्ष्य रखा गया है। महिलाओं के खाते में सीधे पैसे पहुंचने और उनका लाभ सीधे तौर पर बच्चों को मिलने के कारण हिमंत बिस्व सरमा असम में ‘मामा’ के रूप में प्रसिद्ध हो गए हैं। लेकिन हिमंत बिस्व सरमा ने ‘मामा’ के रूप में अपनी छवि सिर्फ सौगात देने वाले तक सीमित नहीं रखी, बल्कि एक रक्षक के रूप में भी बनाई, जो अवैध घुसपैठियों से उनके परिवार की रखा भी करता है।

क्या है चुनावी मुद्दे?

पहली बार अवैध घुसपैठियों, जिसे सरमा मियां मुसलमान कहते हैं, से मुक्ति का भरोसा दिलाने में सफल रहे। 1.65 लाख बीघा जमीन से उनके अवैध कब्जे हटाकर और 1950 के घुसपैठ निरोधक कानून को लागू कर उन्होंने साबित किया कि असम को इस समस्या से मुक्ति दिलाई जा सकती है।

आगे भी वे अवैध घुसपैठियों को निकालने का वायदा भी कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के विरोध और सुप्रीम कोर्ट तक मुद्दा पहुंचने के कारण असम भाजपा ने भले ही हिमंत बिस्व सरमा के अवैध मुस्लिम घुसपैठिये के सिर में गोली मारने का वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल से डिलीट कर दिया हो, लेकिन हिमंत बिस्व सरमा ने इसपर कोई टिप्पणी नहीं कर अवैध घुसपैठ के खिलाफ अपनी कठोर नीति का साफ संदेश देने में सफल रहे।

इसके अलावा भाजपा पहली बार ¨हदुत्व के विशाल साये के तहत सभी नस्लीय, क्षेत्रीय और जातीय विभाजन को खत्म करने में काफी हद तक सफल रही है। आदिवासी, कार्बी, बोडो, अहोम, चायबगान मजबूर, बांग्लादेश से आए हिंदू जैसे खांचे में बंटे समाज को एकजुट करने में आरएसएस की भी अहम भूमिका रही है।

अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में प्रताडि़त अल्पसंख्कों को भारत की नागरिता देने के लिए 2019 में केंद्र के सीएए ने इसमें काफी मदद की है। शायद यही कारण है कि बांग्लादेश से अवैध रूप से आए हिंदू अब राजनीति विमर्श से पूरी तरह से गायब है। जबकि 1985 के असम समझौते में बांग्लादेश मुसलमानों के साथ वहां से आए हिंदुओं को भी वापस करने की बात कही गई थी।

वहीं पिछले 10 साल की भाजपा सरकार की उपलब्धियों को लेकर हिमंत बिस्व सरमा के पास बताने के लिए बहुत कुछ है। इनमें उत्तरी और दक्षिणी गुवाहाटी को जोड़ने वाले ब्रह्मपुत्र पर बने पुल के साथ रेल-रोड की कई परियोजनाएं, 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से सेमीकंडक्टर ईकाई शामिल हैं।

 

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