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शुभेंदु अधिकारी सरकार ने लागू किया गुंडा ऐक्ट

शुभेंदु अधिकारी सरकार ने लागू किया गुंडा ऐक्ट

श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

पश्चिम बंगाल में संगठित अपराध, राजनीतिक हिंसा और उग्र विरोध-प्रदर्शनों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने सोमवार को 2 बहुचर्चित और कड़े कानूनों को प्रभावी रूप से लागू कर दिया है. इन कानूनों के तहत पुलिस प्रशासन को संदिग्ध असामाजिक तत्वों को बिना मुकदमे के 12 महीने तक एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में रखने और दंगों के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की संपत्तियां कुर्क कर नीलाम करने का सीधा अधिकार मिल गया है.

29 जून को विधानसभा में पास हुआ था कानून

29 जून को राज्य विधानसभा से पारित हुए ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ (गुंडा रोधी कानून) और ‘पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026’ सोमवार (13 जुलाई 2026) से पूरे राज्य में लागू हो गये हैं.

क्या हैं ‘गुंडा रोधी कानून 2026’ के मुख्य प्रावधान?

  1. 12 महीने की एहतियाती हिरासत : जिलाधिकारियों और पुलिस कमिश्नरों को अधिकार दिया गया है कि यदि आशंका हो कि कोई व्यक्ति समाज में दहशत या हिंसा फैला सकता है, तो उसे अधिकतम एक वर्ष तक हिरासत में रखा जा सकता है. इस आदेश को 15 दिनों में राज्य सरकार की मंजूरी और 3 हफ्तों में हाईकोर्ट के जज की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड से समीक्षा करानी होगी.
  2. ‘गुंडा’ और ‘असामाजिक गतिविधियों’ का दायरा : अब सिर्फ आदतन अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित गिरोहों के मददगार, अवैध खनन, अवैध रेत खनन, वन/वन्यजीव अपराध, एनडीपीएस (NDPS), हथियार और विस्फोटक अधिनियम के तहत बार-बार अपराध करने वाले भी इस कानून के दायरे में आयेंगे.
  3. तड़ीपार (Externment) का अधिकार : पुलिस आयुक्त और जिलाधिकारी किसी भी संदिग्ध अपराधी को एक वर्ष तक के लिए किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र से बेदखल (तड़ीपार) कर सकेंगे.
  4. गैर-जमानती अपराध : इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती (Cognizable & Non-Bailable) होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी के व्यापक अधिकार मिलेंगे.

दंगाइयों की संपत्ति होगी कुर्क और नीलाम

पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत हिंसक प्रदर्शनों या दंगों के दौरान सार्वजनिक व निजी संपत्ति को पहुंचाये गये नुकसान की पाई-पाई भरपाई आरोपियों से की जायेगी. इसके लिए पुलिस-प्रशासन को आरोपियों की संपत्तियों को तुरंत कुर्क करने और उनकी नीलामी करने का वैधानिक अधिकार दिया गया है.

राजनीतिक घमासान : सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन कानूनों का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य में राजनीतिक हिंसा, रंगदारी और संगठित तोड़फोड़ को जड़ से खत्म करने के लिए सख्त कानूनी प्रावधानों की सख्त जरूरत थी. उन्होंने कहा कि पुराने कानून अपराधियों के मन में डर पैदा करने के लिए पर्याप्त नहीं थे.

विपक्षी दलों ने बताया दमनकारी कानून

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सहित विपक्षी दलों ने इन दोनों कानूनों को ‘दमनकारी’ करार दिया है. विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन असीमित अधिकारों वाले कानूनों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, असहमति की आवाजों और लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के लिए करेगी.

पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार ने सोमवार को दो नए कानून लागू कर लिए यह कानून प्रदेश में संगठित अपराध और हिंसक विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के लिए लागू किए हैं। इसको लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान आया है। शुभेंदु अधिकारी ने कहाकि यह बहुत जरूरी हो गया था। शुभेंदु ने कहाकि कम्यूनिस्ट ठगों ने 34 साल तक बंगाल पर शासन किया। फिर 15 साल तक टीएमसी के गुंडे यहां पर सत्ता में रहे। उन लोगों पर लगाम लगाने के लिए यह कानून बेहद जरूरी था। मुख्यमंत्री ने कहाकि हमारी सरकार ने विधानसभा में इसे पास किया और राज्यपाल ने इस पर मुहर लगा दी है।

गुंडा रोधी कानून

बंगाल में लागू इन कानूनों के तहत अधिकारियों को बिना मुकदमे के संदिग्धों को हिरासत में रखने और दंगाइयों की संपत्ति कुर्क करके नुकसान की भरपाई करने का अधिकार दिया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को बरुईपार में इस कानून के बारे में ऐलान किया था। प्रदेश मुख्यालय नाबन्ना के मुताबिक यह कानून, राज्य में कानून-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

इसके साथ ही साथ संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर लगाम लगाने में भी यह काफी जरूरी होगा। पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026, को ‘गुंडा रोधी कानून’ भी कहा गया है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 सोमवार से प्रभावी हो गए। इन दोनों विधेयकों को राज्य विधानसभा ने 29 जून को पारित किया था।

पुलिस को मिले अधिकार

अधिकारियों के अनुसार, गुंडा रोधी कानून जिलाधिकारियों और पुलिस आयुक्तों को यह अधिकार देता है कि यदि किसी व्यक्ति के असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने की आशंका हो, तो उसे अधिकतम 12 महीने तक एहतियाती हिरासत में रखने का आदेश दिया जा सकता है। हिरासत से जुड़े आदेश को 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार को मंजूरी देनी होगी और तीन सप्ताह के भीतर उच्च न्यायालय के मौजूदा या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले सलाहकार बोर्ड द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस कानून में ‘गुंडा’ की परिभाषा का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब इसमें केवल आदतन हिंसक अपराधी ही नहीं, बल्कि संगठित अपराध गिरोहों से जुड़े लोग, ऐसे अपराधों का वित्तपोषण या सहयोग करने वाले, शस्त्र अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी प्रदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत बार-बार अपराध करने वाले तथा समाज के लिए खतरा माने जाने वाले व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।

बदल गई है परिभाषा

इसके अलावा इस कानून में ‘असामाजिक गतिविधियों’ की परिभाषा का भी काफी विस्तार किया गया है। अब इसमें ऐसी गतिविधियां शामिल होंगी जो लोगों में भय या दहशत फैलाती हों और लोक व्यवस्था को खतरे में डालती हो। इसके अलावा, वैध व्यापार या कारोबार में बाधा उत्पन्न करने, संपत्ति पर अवैध कब्जा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियां भी इसमें शामिल की गई हैं। अवैध खनन, बिना अनुमति रेत खनन, वन एवं वन्यजीव अपराध जैसे आर्थिक और पर्यावरण संबंधी अपराधों को भी इस कानून के दायरे में लाया गया है।

तड़ीपार भी कर सकेंगे

नए प्रावधानों के तहत जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त तड़ीपार करने के आदेश भी जारी कर सकेंगे, जिसके तहत संदिग्ध अपराधियों को एक वर्ष तक किसी निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करने से रोका जा सकेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस अधिनियम के तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे, जिससे पुलिस को बिना वारंट तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तारी करने का अधिकार मिलेगा। पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था अनुरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत सरकार को दंगों या हिंसक प्रदर्शनों के दौरान सार्वजनिक या निजी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई के लिए आरोपियों की संपत्तियों को कुर्क कर उनकी नीलामी करने का अधिकार दिया गया है।

विपक्ष ने क्या कहा

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में इन विधेयकों का समर्थन करते हुए कहा था कि राजनीतिक हिंसा, संगठित अपराध गिरोहों और तोड़फोड़ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए राज्य को कड़े कानूनी प्रावधान करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि मौजूदा कानून पर्याप्त रूप से निरोधक नहीं हैं। वहीं, विपक्ष, विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस, ने इन कानूनों की आलोचना करते हुए इन्हें दमनकारी बताया और आरोप लगाया कि इन प्रावधानों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों और असहमति जताने वालों के खिलाफ किया जा सकता है।

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