सकारात्मक खबरें न मिलने पर युवा गलत राह पर जा सकते हैं-उपराष्ट्रपति
श्रीनारद मीडिया सेंट्रल डेस्क

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यदि समाज में हो रहे सकारात्मक कार्यों और उपलब्धियों को पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी, तो युवा भटक सकते हैं और कॉकरोच जैसी प्रवृत्तियों का अनुसरण करने लगेंगे।
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने मीडिया की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि सकारात्मक खबरों को प्रमुखता से दिखाना जरूरी है, ताकि युवाओं तक सही संदेश पहुंचे।
उन्होंने कहा, “सकारात्मक गतिविधियों की अच्छी तरह रिपोर्टिंग होनी चाहिए। तभी युवाओं को सही जानकारी मिलेगी। अन्यथा वे रुचि खो देंगे और ‘कॉकरोच’ के पीछे चल पड़ेंगे।”
हालांकि उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन किया, लेकिन साथ ही उन मुद्दों को जरूरत से ज्यादा महत्व दिए जाने पर सवाल उठाया जिनका समाज पर स्थायी प्रभाव नहीं होता।
दरअसल, उपराष्ट्रपति का यह बयान हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में आए व्यंग्यात्मक प्लेटफॉर्म ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संदर्भ में माना जा रहा है, जिसने युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रियता हासिल की है।
राधाकृष्णन ने कहा, “अगर कोई चीज वास्तव में अच्छी है, तो लोग एक हफ्ते, 10 दिन या एक महीने बाद भी उसकी अहमियत समझेंगे। अचानक कोई चीज हर जगह दिखने लगे, इसका मतलब यह नहीं कि वह लंबे समय तक टिकेगी।”
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर उस विवाद के बाद चर्चा में आई थी, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की वकीलों को सीनियर दर्जा देने से जुड़ी सुनवाई के दौरान की गई कथित टिप्पणियों को लेकर बहस छिड़ गई थी।
इसके बाद युवाओं ने बेरोजगारी, परीक्षा पत्र लीक और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर मीम्स और व्यंग्यात्मक पोस्ट के जरिए इस प्लेटफॉर्म को वायरल कर दिया।
हालांकि बाद में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा था कि उनका बयान फर्जी और बोगस डिग्री के जरिए कानूनी पेशे में आने वाले लोगों के संदर्भ में था।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रचनात्मक और सकारात्मक रिपोर्टिंग समाज में भरोसा पैदा करती है और लोगों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि करुणा, वैज्ञानिक उपलब्धियों, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों से जुड़ी खबरें सामाजिक बदलाव का मजबूत माध्यम बन सकती हैं।
